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हम बंसती तुम बंसती प्यार का मौसम बंसती

 

साहित्यानंद ने की कवि गोष्ठी, कवियां ने देर रात तक किया काव्य पाठ

Neeraj Chakrpani 

सासनी। बंसत पंचमी के शुभ अवसर पर नगर की साहित्यिक संस्था साहित्यांनंद द्वारा हरिगोपाल गुप्त की अध्यक्षता व वीरेन्द्र जैन नारद के कुशल संचालन में काव्य निशा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंम्भ मॉ सरस्वती के छविचित्र के समक्ष अध्यक्ष द्वारा दीप प्रज्वलन व एमपी सिंह की सरस्वती वंदना के सस्वर पाठ से हुआ तत्पश्चात उन्होने सुनाया—
इस पिजरें के पंछी को रिहाई ना मिली। पर अंतकाल श्री हरि के आगे चतुराई न चली।।
इसके बाद रामनिवास उपाध्याय सुनाया कि राम सेतु को तोडते रामराज के संत। राम विरोधी है गए हे रितुराज बंसत
इसके बाद वीरपाल वीर ने सुनाया कि क्यों करता इस गुमान तन पर इक दिन राख हो जलकर। तत्पश्चात जेपी वर्मा ने सुनाया अफसोस मूढ मन तू मुददत से सो रहा है। सोचा नही कि घर में अधेरा हो रहा है।।
हरि गोपाल गुप्त ने सुनाया शिशिर गई खिसयाय गई रितुराज की देख के महरिया। संचालन कर रहे वीरेन्द्र जैन नारद ने सुनाया–हम बंसती तुम बंसती प्यार का मौसम बंसती। दर्द की बातें न करना अपना तो हर गम बंसती।। इसी के साथ ही गोष्ठी का समापन किया गया। इस मौके पर नीतू उपाध्याय,गोविन्दा उपाध्याय,मुरारी लाल शर्मा मधुर,दुर्गा प्रसाद भंवरी,हनीफ संदली,आदि मौजूद थे।

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