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पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने मुख्यमंत्री से की मांग आलू किसानों को मिले 15 सौ रूपये समर्थन मूल्य

Neeraj Chakrpani 
हाथरस-8 जनवरी। जिले में आलू की खेती होती है जिसमें सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में 90 प्रतिशत आलू किसान हैं और आलू किसानों को पिछले साल से घाटा हो रहा है और उनकी लागत मूल्य बहुत है जबकि उ.प्र. सरकार द्वारा आलू के घोषित किये गये समर्थन मूल्य ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है तथा आलू किसानों को कम से कम 15 सौ रूपये प्रति कुन्टल समर्थन मूल्य मिलना चाहिये। आलू किसान बर्बाद हैं और भुखमरी के कगार हैं। किसान खुशहाल होगा तो सब खुशहाल होंगे।
उक्त बातें आज सादाबाद के विधायक एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने अपने लेवर कालौनी स्थित आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में कहीं। उन्होंने कहा कि मेरी विधानसभा क्षेत्र सादाबाद के किसानों का जीवनयापन आलू की खेती पर पूर्णतः निर्धारित है वहीं सरकार द्वारा बिजली के दाम बढाकर किसानों द्वारा की जा रही सिंचाई काफी महंगी कर दी गई है लेकिन आज किसान को आलू का लागत के अनुसार निर्धारित मूल्य न मिल पाने से किसान भुखमरी की कगार पर है। किसान को आलू की पैदावारी में करीब 1000 रू. प्रति कुन्तल का खर्चा आता है जिसमें 7000 रू. बीघा की खेती पट्टे पर लेकर उसमें लगभग 1500 रू. की जुताई, 700 रू. की बुवाई एवं खुदाई, 350 रू. प्रति कुंतल का बीज, 1080 रू. प्रति बोरी डीएपी, 230 रू. प्रति बोरी यूरिया, 800 रू. की कीटनाशक दवा, करीब 1000 रू. की सिंचाई, 3500 रू. मजदूरी एवं बारदाना खर्च जैसे खर्चे शामिल हैं।
पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने कहा कि बहुत ही दुख की बात है कि पिछले तीन वर्षो से किसान को उचित निर्धारित भुगतान नहीं मिल पा रहा है। यदि आज के समय में किसी किसान के घर में कोई परिवारीजन बीमारी से ग्रसित अथवा दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो किसान द्वारा अपने घर के सामान अथवा खेत को बेचकर उसका इलाज कराया जाता है। आज सरकार द्वारा किसान को मात्र 467 रू. प्रति कुन्तल (दो बोरी) के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सादाबाद विधान सभा क्षेत्र के समस्त किसानों की ओर वह आग्रह करते हैं कि किसान को आलू की पैदावारी में खर्च होने वाली लागत के हिसाब से करीब 1500 रू. प्रति कुन्तल के हिसाब से समर्थन मूल्य निर्धारित करें। जिससे कि किसान अपना जीवनयापन कर सकें।

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