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50 फीसद कमीशन लेकर किताबें बेच रहे है प्राइवेट स्कूल प्रशासन व शिक्षा विभाग मौन

Rajeev Gautam 
खैर। निजी स्कूल संचालकों ने प्राइबेट प्रकाशकों के साथ मिलकर अभिभावकों को लूटने का काम शुरू कर दिया है। जिन स्कूलों में बच्चों के लिये एनसीईआरटी की किताबें लगानी चाहिये, वहां तानाशाह व कमीशनखोर स्कूल संचालक बच्चों को निजी प्रकाशकों की किताबें पढने को मजबूर कर रहे है। क्योंकि प्रकाशकों की ओर से स्कूल संचालकों को मोटा कमीशन दिया जा रहा है। यह कमीशन 30 से 50 फीसद है। किताबें कौन से प्रकाशक की लगेगी यह भी कमीशन पर निर्भर है।
इतना ही नही कुछ स्कूल संचालक ने विधालय से ही किताबें, डेªस, टाई, बैल्ट बेचना शुरू कर दिया है। कार्यवाही के डर से कुछ बुकसेलर व स्कूल संचालक बिल के नाम पर बिना प्रिंट बाली कागज की पर्ची अभिभावकों को दे रहे है। वही कुछ दुकानदारों ने गोदामों को गलियों में शिफ्ट कर दिया है ताकि किसी भी प्रकार की छापामार कार्यवाही से बचा जा सके। स्कूलों में दाखिला के समय ही दुकानदार की पर्ची अभिभावकों को थमा दी जाती है। अभिभावक घंटों लाइन में लगकर एक ही दुकान से किताबें खरीदने को बाध्य है। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा अगले पांच वर्ष तक किताबें व पाठयक्रम न बदले जाने के आदेश है किन्तु अधिकांश स्कूल संचालक तानाशाही व कमीशनखोरी के बल पर प्रतिवर्ष किताबों को बदलकर मोटी कमाई कर रहे है। कस्बा के जिम्मेदार व जागरूक लोगों ने मामले की शिकायत सीएम पोर्टल पर दर्ज कराते हुये जिलाधिकारी, डीआईओएस, बीएसए व एसडीएम को भी समस्या से अवगत कराया है। पीडित अभिभावकों ने कमीशनखोर स्कूल संचालकों की मान्यता समाप्त करने के लिये सीबीएसई व यूपी बोर्ड को भी शिकायती पत्र भेजे है। उक्त मामले में एसडीएम खैर पंकज कुमार ने तानाशाह बुकसेलरों व निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के सकेंत दिये है।

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