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पिता थे दिलेर बेटा भी दिलेर, फिर भी उखाड़ फैंका मां का आशियाना

नीरज चक्रपाणि
हाथरस। मां की ममता को रौंदते हुए भगवा ने जमकर मो संग दी अलाप अलापा। फिर भी कुर्सियों पर टिकने वालों की कमी पड़ गई। कहने को तो भले ही कहते रहें कि वह दिलेर हैं, लेकिन जिस दिन अपने दम पर मैचिंग करेंगे तो जानेगे। मो मो और दी दी तो कहकर हर कोई कबड्डी जितता दिखाई दे रहा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि मो मो और दी दी की लहर में फिर से हाथरस की जनता को बाहरी थोपा गया है। अगर सदन में भगवा लहराया तो फिर से लोस का पैसा यहां से वापस न लौट जाए।
जीहां! हम बात हाथरस जंक्शन से अगले चैराहे के पास की कर रहे हैं, जहां पर गैरूआ की जमात जुड़ी थी और हल्ला मचाया था प्रमोद ने। भले ही उस जमात में सेंगरों की भीड़ भी नहीं जुट पाई थी, लेकिन भीड़ जुटाने वालों से हम पूछते हैं कि ऐसा क्या हो गया कि किराए के टट्टुओं की आवश्यकता पड़ गई जो समय से पहले ही उड़न-छू हो गए। हालांकि माहौल बनाने वाले भले ही यह कह रहे हों कि मो और दी जीत रहे हैं, यह सत्य हो सकता है कि सदन में कोई नेता फिर से काका की लाइनो को उच्चारित करे, लेकिन उन लाइनों से ख्यात लूटलेना सबकुछ नहीं है। उस स्थान की तरक्की का जिम्मा भी उन्हीं पर जाता है जो काका को पढ़ने के लिए सदन में मजबूर होते हैं, कमी लाइनों को पड़कर लूटने वालों की नहीं है। बल्कि कमी तो ऐसे दिलेरों की है जो हाथरस नगरी के लिए आए तरक्की के पैसे को भी लौटा देते हैं। हां देखते हैं पिता जी तो कुछ कर नहीं पाए, क्योंकि उनका तो चेहरा भी देखने के लिए जनता तरस गई थी जो बेटा जी कुछ करेंगे ?
हाथरस जंक्शन से अगले चैराहे पर जो हुआ सो तो लोगों ने अपने नैनों से देख ही लिया कि गो माता का आशियाना ही सभा के लिए उखाड़ फेंका। जब मां का अपमान करोगे तो सभा में भीड़ कहां से आएगी, रही बात किराए के टट्टुओं की तो वह तो राजनीति का एक अंग है ही, लेकिन जनाब यह जनता है सब जानती है। इतना ओवर काॅनफीडेंस भी नहीं होना चाहिए। हमने अंतिम मूमेंट में पारियां बदलते देखा है। दुखद बात तो यह है कि कुर्सियों पर बैठने वाले नहीं थे तो पीने के पानी को लोग प्यासे तरसते रहे और पानी एक कौने में धरा बिराजता रहा। देखते हैं कि नाऊ-नाऊ बार कितने है, ठाकुर सहाब सब सामने आए जाते हैं। भाई अभी तो 23 मई तक के ही दिलेर हैं। अगर रप्पा लग गया तो हाथरस की जनता को कहीं खून के आंसू न रोने पड़ें। क्योंकि जो अभी से जनता के पास जाने में हिचकिचा रहा है हाईस्कूल फेल सदन में हाथरस की बात क्या उठाएगा। जो अपने मुखिया के खिलाफ कई वीडियो वाॅयरल कर चुका है तो जनता का सगा कैसे होगा। समझ तो यह नहीं आ रहा है कि जो चंद महीनों पहले भगवा सत्ता के खिलाफ अपनी सभाओं और कार्यक्रमों में उल्टा बोल रहा था, आखिर उसके गले में भगवा पट्टा कैसे व किसने बांध दिया। खैर जो भी ‘‘हो होई है वही जो रामरचि राखा काहि कर तरक बढ़ावई साखा’’।

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