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आरोप सही हैं तो क्या कैंसिल हो जाएगा चुनाव या होगा निर्विरोध निर्वाचन

नीरज चक्रपाणि
हाथरस। सत्य की राह पर चलने निकले हैं यानि लोकसभा में जाने की तैयारी है और कूटरचित प्रपत्र दाखिल कर रहे हैं तो यह गंभीर आरोपों की श्रेणी में आ गया। अब आरोप सही हैं या गलत हैं यह तो चुनाव आयोग ही जाने अगर विशेषज्ञों की माने तो यह गलत है और आरोप सिद्ध होते हैं चुनाव आयोग इसमें चुनावी प्रक्रिया को पुनः करा सकता है या फिर वो जो उचित हो। खैर क्या होगा यह तो अब ईमानदारी से जांच हो और जांच अधिकारी की सोच पर निर्भर करता है।
क्या है पूरा मामला आइए फिर से जाडें नजरः.
यह विदित हो कि हाथरस में 18 अप्रैल को करीब 18 लाख मतदाता और 18 वीं वार ही वोट करने वाले हैंए लेकिन प्रश्न यह है कि करेंगे किसको घ् क्योंकि यह आरोप लगा है कि करीब आधा दर्जन से अधिक प्रत्याशियों के जो प्रपत्र.दाखिल किए गए हैं वह कूट रचित हैं। यानि गलत हैं। क्योंकि आरोप लगाया गया है कि नामांकन.पत्रों में कूटरचित और फर्जी शपथ.पत्र दाखिल किए गए हैं। आरोप लगाने वाले सपा के पूर्व जिला प्रवक्ता अजयकुमार शर्मा ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि यह फर्जी शपथ.पत्र जिस अधिवक्ता द्वारा दिए गए हैं। वह पिछले करीब डेढ माह से बाहर हैं। यानि हाथरस के बजाय अपने पुत्र के पास बंगलौर में रह रहे हैं तो यह शपथ.पत्र उनके नाम से बन कैसे गए। मतलब गलतए लेकिन यह आरोप है। आरोप के संबंध में डीएम ने भी 24 घंटे में इस संबंध में जांच करने को कहा गया है।
अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या होगा घ्
मतलब जो आरोप शिकायत में लगाए हैं या चुनाव आयोग को भेजे गए हैं। अगर जांच में सही पाए जाते हैं तो क्या होने वाला है। इस प्रश्न सभी के जहन में गूंज रहा है। लोगों में जो चर्चाएं हैए उनको अगर माने तो बड़ा प्रश्न उठता है कि क्या चुनाव कैंसिल होगा या फिर जिसके प्रपत्र.सही हैं वह निर्विरोध निर्वाचित हो जाएगा अथवा यहां पर भी जांच पर सत्ता का दबाव पड़ेगा। यह सिर्फ चर्चाएं हैं।
क्या कहता है कानूनः.
पूर्व अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन व वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव तिवारी कहते हैं कि देखिए अगर आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो जिन प्रत्याशियों के नामांकन गलत हैं कैंसिल हो सकते हैं। अब चुनाव कैंसिल या फिर निर्विरोध निर्वाचन यह फेसला लेने का अधिकार निर्वाचन आयोग का है और अगर आरोप गलत पाए जाते हैं तो चुनाव प्रक्रिया यथावत।

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