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3 राजनीतिक दलों सहित 8 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे लोकसभा हाथरस के 18 लाख मतदाता

नीरज चक्रपाणि
हाथरस —हाथ हाथ में रस लिए बात बात में बात शहर हाथरस कर रहा हर रस की बरसात । जी हाँ आज हम बात कर रहे है काका हाथरसी की नगरी हाथरस की। जिन्होंने चुनावी मौसम पर भी कविता के माध्यम से कहा था कि , अगर चुनावी वायदे पूर्ण करे सरकार , इंतजार के मजे सब ,हो जाये बेकार।हाथरस लोक सभा सीट का इतिहास बढ़ा दिलचस्प है ,यहाँ लोकसभा चुनाव की शुरुआत में कांग्रेस का दबदबा रहा । लोकसभा सीट हाथरस पर जाट व ब्राह्मण वोटरों का खासा प्रभाव रहा है. पिछले करीब दो दशक से यहां पर भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व रहा है, ऐसे में एक बार फिर 2019 में बीजेपी को यहां कमल खिलने की उम्मीद है. हाथरस सीट पर मुस्लिम-जाट का समीकरण हावी रहता है,

भारतीय जनता पार्टी के राजवीर दिलेर

यही कारण है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी इस सीट पर प्रबल दावेदार रहती है. हाथरस लोकसभा सीट आरक्षित सीटों में आती है।इस सीट पर 1962 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस पार्टी ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी. उसके बाद 1967, 1971 में भी यहां कांग्रेस का परचम लहराया. 1977 में चली सत्ता विरोधी लहर में भारतीय लोक दल ने जीत दर्ज की, जबकि 1984 में भी यहां कांग्रेस ने वापसी की. 1989 में हुआ चुनाव यहां जनता दल के खाते में गया था। 1991 के बाद से ही ये सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रही है. 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में यहां भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज की. इस दौरान बीजेपी के किशन लाल दिलेर 1996-2004 तक सांसद रहे. 2009 में यहां राष्ट्रीय लोकदल के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, हालांकि तब रालोद-बीजेपी का गठबंधन था.

गठबंधन से रामजीलाल सुमन

वहीं 2014 में तो बीजेपी के राजेश कुमार दिवाकर ने यहां से 544277 वोटो से प्रचंड जीत दर्ज की।चुनावी आंकड़ों के अनुसार, यहां पर करीब 18 लाख से अधिक मतदाता हैं, इनमें से करीब 9.9 लाख पुरुष वोटर और 8.4 लाख महिला मतदाता हैं।बीते कई चुनावों में बसपा को यहां पर लगातार लाखों वोट मिले हैं, इसलिए बसपा को इस सीट पर कमतर नहीं आंका जा सकता है. हाथरस लोकसभा सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें छर्रा, इगलास, हाथरस, सादाबाद और सिकंदरा राऊ सीटें शामिल हैं. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां सिर्फ सादाबाद में बसपा ने जीत दर्ज की थी, जबकि बाकी अन्य सीटों पर बीजेपी ने झंडा गाढ़ा था।पिछले चुनाव में यहां मोदी लहर का असर साफ देखने को मिला था, भारतीय जनता पार्टी के राजेश कुमार दिवाकर को 2014 में यहां कुल 51 फीसदी वोट मिले थे. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को करीब 3 लाख वोटों से हराया था. 2014 में यहां कुल 59 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें से नोटा को 5000 के करीब वोट मिले थे।हाथरस से बीजेपी सांसद राजेश दिवाकर साफ-सुथरी छवि वाले नेता माने जाते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर वह पहली बार सांसद चुने गए. 2014 से ही वह संसद की कई कमेटियों का हिस्सा रहे हैं.

कांग्रेस से त्रिलोकीराम दिवाक

16वीं लोकसभा में उन्होंने कुल 8 बहस में हिस्सा लिया है, इस दौरान उन्होंने 263 सवाल भी पूछे. ।क्त् के आंकड़ों के मुताबिक, राजेश कुमार दिवाकर के पास करीब 56 लाख से अधिक की संपत्ति है. राजेश दिवाकर ने अपने संसदीय फंड की 85 फीसदी राशि खर्च की है।
हाथरस लोक सभा के चुनावी समर में इस बार 3 राजनितिक दलों के भारतीय जनता पार्टी के राजवीर दिलेर , गठबंधन से रामजीलाल सुमन व कांग्रेस से त्रिलोकीराम दिवाक सहित कुल 8 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है द्य जिनका फैसला आगामी 18 अप्रेल को करीब 18 लाख से अधिक मतदाता करेंगे।

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