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ऋतुराज बसंत के आवत ही कोयल बोली फूले अमरा

Neeraj Chakrpani 
हाथरस- सादाबाद गेट स्थित धन्वन्तरि औषधालय में ऋ़तुराज बसन्त की स्वागतमयी कविताओं के साथ 179 वां मासिक कवि दरबार सम्पन्न हुआ। कवि दरबार का शुभारंभ वीणा पाणि मां सरस्वती जी की वंदना-जयति जय-जय मां सरस्वती, जयति वीणा वादिनी कविता से हुआ।वैद्य मोहन ब्रजेश रावत ने बसन्त ऋतु का स्वागत इस कविता से किया-ऋतुराज बसंत के आवत ही, कोयल बोली फूले अमरा, मादकता चहुंओर दिखी, कलियन मंडराये भंवरा। रोशनलाल रोशन-बासंती फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन, वहां मधुकर करन लगे गुंजन, ईश्वर से हो प्यार सभी का, महक उठे कुंजन-कुंजन। प्रदीप पंडित-हम सभी आये यहां मां सरस्वती के सम्मान में, बसन्तोत्सव के सम्मान में, राधेकृष्ण के सम्मान में। जयप्रकाश शर्मा-रंग बसंत के, कदम-कदम पर प्यार के, स्वागत है शतवार, तुम्हारा स्वागत है शतवार।
कवियों का स्वागत करते हुये बसन्तोतसव पर्व की शुभकामनायें कवि दरबार के संस्थापक वैद्य मोहन ब्रजेश रावत तथा प्रचार प्रभारी जयप्रकाश शर्मा द्वारा प्रदान की गयीं।

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