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नई दिल्ली में आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामना-ई के जीवन, सेवाओं तथा चिंतन पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार

अलीगढ़ 9 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर लतीफ हुसैन शाह काज़मी ने जामिया हमदर्द, नई दिल्ली में आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामना-ई के जीवन, सेवाओं तथा चिंतन पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार में भाग लेकर “ईरानी क्रंाति तथा इस्लामी एकताः आयतुल्लाह ख़ामना-ई की भूमिका” विषय पर शोध पत्र प्रसतुत किया।

प्रोफेसर काज़मी ने अपने पत्र में कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की क्रांती से इस्लामी धर्म के मानने वालों के विकास के लिए विभिन्न सकारत्मक बातें सामने आईं जिनमें से एक इस्लामी एकता भी है। इसके प्रकाश में इमाम खु़मैंनी तथा आयतुल्लाह ख़ामनाई अपने सामाजिक तथा राजनेतिक दृष्टिकोण तथा कार्य शैली में इस्लाम धर्म के मानने वालों के बीच किसी भी प्रकार के अपसी मतभेद एवं बंटवारे को नकार कर मुसलमानों की एकता की वकालत करते है। उनका विश्वास है कि ईरान जैसे इस्लामी राष्ट्र का उद्देश्य मानव जाति का अध्यात्मक पुनर्जागरण है जिसके लिए एकता आवश्यक है। उनके लिए राजशाही एक अस्वीकार्य व्यवस्था है तथा यह मनाव जाति के बीच मतभेद को विकसित करती है।

प्रोफेसर काज़मी के शोध पत्र में इस्लाम के मानने वालों कि संसारिक़ एवं अध्यात्मिक विकास के लिए इस्लामी एकता की प्रासंगिक्ता से संबंधित आयतुल्लाह ख़ामनाई की विचारधारा एवं संदेशों के विशेष बिंदुओं पर प्रकाश डाला जिसकी सैमीनार में काफी सराहना की गई।

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