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बच्चे को शिक्षित करने में शिक्षक व अभिभावकों का अनुशासित अत्यंत अनिवार्य हैं-तृप्ति तिवारी।

Prasoon bajpai 
खुर्जा। नगर के लाॅयल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य तृप्ति तिवारी का मानना हैं कि बच्चों को शिक्षित करने में जितना अहम् योगदान शिक्षक का होता हैं उससे कहीं अधिक बच्चे के अभिभावक का होता हैं। क्योकि बच्चा मात्रा 5 से 6 घंटे ही विद्यालय में रहता हैं जबकि सबसे अधिक समय बच्चा अपने घर में रहता हैं। आज के समय को देखते हुए छात्र व शिक्षकों में मधुर सम्बंध बनाये रखने के लिये अभिभावको व शिक्षकों को संयुक्त रूप से प्रयास करने होगे। बच्चे को भी ठीक प्रकार से अपने शिक्षक से पूरे आदरभाव से शिक्षा गंहण करनी चाहिये। वही शिक्षक को पूरी ईमानदारी व मेहनत से अपना कार्य करना चाहिये। एक प्रेेसवार्ता के दौरान लाॅयल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य तृप्ति तिवारी ने मीडियाकर्मियों से कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले समय में उनके विद्यालय में कुछ महत्वपूर्ण सुधार किये जायेंगे। जिसकी प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी हैं। उन्होने कहा कि नये परिवेश में विद्यालय के छात्र और अधिक सुगम प्रकार से विद्यालय में ज्ञान अर्जित कर सकेगे। उन्होंने सभी अभिभावकों के लिये कहा कि यदि आप बच्चे को श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं तो उनको शिक्षा के प्रति जागरूक होना होगा। बच्चों को आदरभाव सिखाना होगा तथा उनको गुरू व शिष्य के सबंधों के बारे में सही जानकारी देनी होगी। बच्चों की दिनचर्या को शिक्षा के अनुकूल ढलना होगा। वही शिक्षकों को भी पूरी लगन व मेहनत तथा पूरी ईमानदारी तथा अनुशासित होकर अपना कार्य करना चाहिये।उन्होंने कहा कि बच्चे की लगन के अनुसार बच्चे की शिक्षा व अन्य क्रिया कलाप अभिभावकों द्वारा कराने चाहिये। बच्चों को नकारात्मक सोच से दूर रखना चहिये। बच्चों को उसकी अच्छाइयों का समय समय पर बोध कराते रहना चाहिये जिससे बच्चा निरंतर प्रगति करेगा तथा शिक्षा के प्रति हमेशा उत्साही बना रहेगा।

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