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आत्महत्या नही हत्या है उच्च स्तरीय जांच की मांग

 

इगलास। क्षेत्र के गांव नाया निवासी दरोगा विजय कुमार की मौत को परिजन हत्या का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे है। परिजनों का कहना है मौत की घटना में जब तक विधायक व उच्च स्तरीय अधिकारी उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन नहीं देते है शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार कल सुबह चार बजे जनपद गाजियाबाद के थाना कवि नगर में तैनात दारोगा की सिर में गोली लगने से मौत हो गई। इस खबर के बाद पत्नी कविता पुत्र शिवम व ऋतिक का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि थाना कवि नगर की पुलिस आत्महत्या की बात कह रही है जबकि परिजन इसको झूठा ठहरा रहे हैै। परिजनों का कहना है कि वे बहुत ही बहादुर थे। इस संबंध में तहेरे भाई पुष्पेन्द्र सिंह व ग्राम प्रधान नीरज सिंह आदि अन्य लोगों का कहना है कि वे किसी भी हालत में आत्महत्या नहीं कर सकते। उनका आरोप है कि उनकी हत्या की गई, हत्या की उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन उच्च स्तरीय अधिकारी व विधायक द्वारा नहीं दिया जाता है तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

गाॅव में शव आने पर विलाप करते परिजन

बहादुर थे मेरे पति साजिशन हुई हत्या – कविता
इगलास। गाजियाबाद के कबीर नगर थाने में तैनात दरोगा विजय कुमार ठेनुआँ की हुई गोली से मौत के मामले में उनकी पत्नीने रो रोकर बताया कि उनके पति बहादुर थे उनकी साजिशन हत्या हुई है।
पत्नी कविता का आरोप है कि उनकी मंगलवार की शाम को फोन पर काफी देर वार्ता हुई थी उनकी बातों से ऐसा नही लगा कि वह डिप्रेशन में हैं बातें भी रोजाना की भांति हुई थी। कभी घर में भी कोई विवाद नही रहा जिससे उन्हें ऐसा करना पड़े। जरूर ही उनकी साजिशन हत्या हुई है। वो चाहती हैं कि उनके पति की मौत के मामले में सीआबी जांच हो । तैयरे भाई पुष्पेंद्र ने बताया कि गाजियाबाद पुलिस हमें गुमराह करती रही और हमें अस्पताल में उनके पास तक नही जाने दिया। उनका भाई तीन घंटे जीवित रहा है गाजियाबाद एसएसपी से उनकी अस्पताल में बात हुई हैं जो एसएसपी ने आत्महत्या की बात कही है सरासर गलत है उनके भाई ने कभी दबाब में आकर काम नही किया। उनपर जो आरोप लगा है बलवा के मामले में डिप्रेशन में थे गलत है। इस मौत के मामले उच्च स्तरीय जांच कमेटी बैठाई जाए जभी पर्दाफास हो पायेगा। गांव के प्रधान नीरज ने बताया कि एक सप्ताह में उनकी बात जरूर होती थी वो कभी ऐसा कर ही नही सकते। कभी उनके ऊपर डिप्रेशन नही दिखता था। एक दम खुश दिल इंसान थे।

आठ दिन पूर्व आये थे गांव नाया

इगलास। ग्रामीणों ने बताया कि दरोगा विजय कुमार आठ दिन पूर्व गांव आये थे। पुराने घर का जीर्णोद्धार का काम चल रहा है उसे देखने आते जाते रहते थे। उन्होंने बताया कि 2 फरबरी को उनकी बात हुई थी कुशलता की बाते भी हुई थी। विजय कुमार की पत्नी अपने दो बेटों के साथ बालाजीपुरम मथुरा में रहती थी । विजय पर दो बेटे थे जो शिवम इंटरमीडिएट का व रितिक दसवीं का छात्र था जो मथुरा में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।विजय के पिता का 2001 में देहांत हो चुका है उनकी माँ माया देवी गांव में अकेली रहती हैं। मृतक विजय कुमार एकलौते बेटे थे व तीन बहिनें हैं। विजय 1996 में कॉन्स्टेबल पद भर्ती हुए थे उसके बाद प्रमोशन से 2016 मे दरोगा बन गए।

परिजनों का रो रोकर बुरा हाल

शव को गाड़ी से बाहर आने से ग्रामीण

इगलास। दरोगा विजय कुमार पुत्र महेंद्र सिंह की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों का रो रोकारबुरा हाल है। माँ माया देवी बेहोश की अवस्था में हैं। तीनों बहिने सुनीता, मंजू व अनिता का भी रो रोकर बुरा हाल बना हुआ है। घर के बाहर आने जाने वालों का हुजूम बना है । बहिनों का कहना है कि उनका भाई बुजदिल नही था जो ऐसी घटना को अंजाम देगा। कभी भी उसका गांव कर किसी व्यक्ति से भी कोई झगड़ा तक नही होता था।

शव पहुंचते ही परिजनों ने किया हंगामा
दरोगा विजय कुमार का शव गांव में आया घर के बाहर चीख पुकार शुरू हो गयी। ग्रामीणों व परिजनों ने शव को गाड़ी से नही निकलने दिया। पुलिस के वाहन में आये शव को देखते ही बाहर से गेट लगा दिया। एसएसपी डीएम को मौके पर आने तक शव को गाड़ी से बाहर आने की बात कही। ग्रामीणों का आरोप था कि शव के साथ केवल दो दरोगा व चार सिपाही आये है । कोई भी दोनों जिलों से अधिकारी नही आया। जब तक कोई भी अधिकारी गांव नही पहुंचेगा शव को नही उतारा जाएगा। अधिकारियों द्वारा सीबीआई जांच का आश्वासन देने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। खबर लिखे जाने तक कोई अधिकारी गाँव नही पहुंचा है।

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