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20 हजार रूपये से अधिक वार्षिक शुल्क लेने वाले विद्यालय अभिभावक को एक साथ जमा करने के लिए नहीं करेंगे बाध्य

 

 

अभिभावक की सुविधानुसार वार्षिक शुल्क मासिकए त्रैमासिक एवं अर्द्धवार्षिक किश्तों में लिया जाए

शिक्षकों के वेतन वृद्धि की स्थिति में अनुज्ञात शुल्क 5 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ा सकेंगे विद्यालय

कोई भी विद्यालय 5 वर्ष से पूर्व नहीं बदल सकेंगे यूनिफॉर्म

जिला शुल्क नियामक समिति के नियमों का उल्लंघन करने पर लगेगा अर्थदण्ड

35 सीटर से अधिक की बसें विद्यालयों में न चलाई जाएं

सभी मान्यता प्राप्त विद्यालय सरकारी गजट उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित नियम के अनुसार ही विद्यालयों में शुल्क लेंगे तथा नियम के अनुसार ही शुल्कों में वृद्धि करेंगे। कॉशन मनी की धनराशि को टी0सी0 कटने के 30 दिन के अन्दर बैंक ब्याज सहित छात्र को वापस करेंगे। प्रत्येक विद्यालय रजिस्ट्रेशन एवं प्रवेश शुल्क एक ही बार लेगा जब किसी नये छात्र का विद्यालय में प्रवेश होगा।

यह विचार अपर जिलाधिकारी नगर एस0बी0 सिंह ने कलैक्ट्रेट सभागार में शुल्क नियामक समिति की बैठक में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि जो विद्यालय बच्चों से 20 हजार रूपये से अधिक वार्षिक शुल्क ले रहे हैं वह सभी विद्यालय एक्ट की परिधि में आते हैं और कोई भी विद्यालय अभिभावक से एक साथ शुल्क जमा करने का दबाव नहीं डालेगा। अभिभावक के सुविधानुसार शुल्क को मासिकए त्रैमासिक एवं अर्द्धवार्षिक के रूप में लिया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिये कि प्रत्येक विद्यालय की शुल्क संग्रह की प्रक्रिया खुलीए पारदर्शी एवं उत्तरदायी होनी चाहिये।

श्री सिंह ने सभी विद्यालयों को निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी विद्यालय में 35 सीटर से बड़ी बस नहीं होनी चाहिए और बसों की स्थिति अच्छी हालत में हो तथा प्रत्येक बसों का संभागीय परिवहन अधिकारी द्वारा निर्गत फिटनेस प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी विद्यालय अपने स्कूल में रोड ट्रैफिक आफीसर बनाएं जो बसों की स्थिति एवं बच्चों की सुविधा का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने चालक एवं परिचालक का पुलिस वेरीफिकेशन आवश्यक रूप से कराए जाने के भी निर्देश दिये।

बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मेन्द्र शर्मा ने बताया कि अनुज्ञात शुल्क वृद्धि मान्यता प्राप्त विद्यालय अपने विद्यमान छात्रों के लिए पूर्ववर्ती वर्ष के अध्यापन कर्मचारी वर्ग के मासिक वेतन में प्रति व्यक्ति वृद्धि के औसत के बराबर ही लिया जाएगा किन्तु यह 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिला शुल्क नियामक समिति मान्यता प्राप्त विद्यालयों द्वारा शुल्क वृद्धि के सम्बन्ध में दिए गये प्रस्तावों और कारणों पर विचार करके प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है और कितने प्रतिशत शुल्क में वृद्धि हो इसको भी निश्चित कर सकती है।

श्री शर्मा ने बताया कि जो विद्यालय जिला शुल्क नियामक समिति के नियमों का उल्लंघन करेंगे उन्हें प्रथम उल्लंघन पर 1 लाख रूपये का अर्थ दण्डए द्वितीय पर 5 लाख रूपये तथा तीसरी बार उल्लंघन पर मान्यता समाप्ति की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई भी विद्यालय 5 वर्ष से पूर्व अपने विद्यालय की यूनीफॉर्म नहीं बदलेगा एवं बच्चों तथा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए दबाव नहीं डालेगा।

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