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‘‘भारतीय दर्शनशास्त्र दिवस’’ के अवसर पर एक सिम्पोजियम का किया गया आयोजन

अलीगढ़ 8 अक्टूबरः अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के दर्शनशास्त्र विभाग में इंडियन कौन्सिल आॅफ फिलोस्फिकल रिसर्च (आईसीपीआर) के सहयोग से आज ‘‘भारतीय दर्शनशास्त्र दिवस’’ के अवसर पर एक सिम्पोजियम का आयोजन किया गया जिसका विषय ‘‘भारत के नैतिक मूल्यों की बहुमुखी प्रवृतियाॅ’’ था।

पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो. लल्लन सिंह बघेल ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि भारत में सृष्टि तथा संसार के उद्देश्य तथा अस्तित्व के प्रश्नों पर प्राचीन काल से विचार होता रहा है। हम कौन हैं? शरीर तथा जात के बीच क्या रिश्ता है? यह संसार किस लिये है? इसका रचियता कौन है? ज्ञान तथा इसकी प्रवृति क्या है? वास्तविका की कितनी परतें हैं? तथा व्यक्ति कैसे ज्ञान प्राप्त करता है? इस प्रकार के प्रश्नों पर सदैव चर्चा होती रही है। प्रो. बघेल ने कहा कि पश्चिमी दर्शन शास्त्र के विपरीत भारतीय आस्तिक दर्शनशास्त्र तथा नास्तिक दर्शन शास्त्र की विभिन्न शाखाऐं शताब्दियों तक मौजूद रहीं तथा कभी कभी आपस के कठोर वाद विवाद के बीच उनका विकास हुआ।

अमुवि के संस्कृत विभाग के प्रो. एसडी कोशिक ने बौद्ध अध्यात्मक पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बौद्ध दर्शन शास्त्र हमें यह बताता है कि जीवन एक दुख, पीड़ा है तथा वह नष्ट हो जाने वाला है। जीवन अधिकतर दुख एवं कठिनाइयों से भरा होता है और सबसे अच्छी परिस्थितयों में भी यह कभी पूर्ण रूप से आरामदायक नहीं होता। उन्होंने कहा कि पीड़ा तनहाई से उत्पन्न होती है

प्रो. कोशिक ने कहा कि बौद्ध दर्शन शास्त्र के अनुसार जीवन के दुखों से निर्वाहन से ही निजात सम्भव है जो सदैव के लिये पीड़ा से छुटकारा देता है। आईसीपीआर के सदस्य प्रो. यूएस बिष्ट ने उपनिषद तथा वैदांत के दर्शन शास्त्र पर प्रकाश डालते हुए न्याय, विशेषिका, सामख्या, योगा, पूरवा-मेमानसा आदि पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वेदंात में सृष्टि के रचियता के स्थान पर आत्मा को केन्द्र बिन्दू प्राप्त है तथा समस्त प्रयास इस आश्य का रहता है कि आत्मा की पूर्ति हो। प्रो. बिश्ट ने वेदांत के विभिन्न चिंतकों, शंकराचार्यों, रामानूजाचार्या, माधवाचार्या तथा वल्लभाचार्या के विचारों पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व दर्शन शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. तारिक इस्लाम ने विषय का परिचय कराते हुए कहा कि भारती दर्शन शास्तनिक दृष्टिकोण में वास्तविकता, ज्ञान, मूल्यों, बौद्धिक आदि पर चर्चा की गयी है तथा भारतीय दर्शन शास्त्र दिवस मनाने की अपनी एक विशेष प्रासंगिकता है।

डाॅ. अकील अहमद ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया जबकि श्री बोधेन्द्र कुमार ने उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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