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रूकमणी विवाह में झूमे भक्त

नीरज चक्रपाणि,सासनी- कस्बा के ठंडी सडक स्थित श्री राधा जी मंदिर परिसर में श्री महिला हरी संकीर्तन मंडल के बैनरतले चल रहे श्रीमद भागवत कथा प्रवचन के दौरान आचार्य श्री राघव जी महाराज ने रूकमणी भगवान श्रीकृष्ण कथा का रोचक वर्णन किया। जिसे सुन श्रोता झूम उठे।
आचार्य ने इतवार की कथा में सुनाया कि रुक्मिणी भगवान कृष्ण की पहली रानी थी। कथा में झांकियों सहित प्रस्तुत इस प्रसंग से श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का। दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से, मेरे श्याम की शादी है, बहारो फूल बरसाओ, रास रचो रे, मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो ,द्वारे पे आ गई बारात आदि भजनो की प्रस्तुति पर श्रोता थिरकने लगे। कथा का भावार्थ बताते हुए आचार्य ने बताया कि वर्तमान युग में तीर्थवास, परमात्मा का ध्यान, मन तथा इन्द्रियों का निग्रह, ब्रह्म्चर्यपालन, एकान्त-वास आदि कठोर विधि-विधानों का पालन कर पाना सम्भव नहीं है। किन्तु कृष्ण भावनामृत के अभ्यास से मनुष्य भगवान् की नवधाभक्ति का आचरण करता है। ऐसी भक्ति का प्रथम अंग है-कृष्ण के विषय में श्रवण करना मन के समस्त प्रकार की चिंताओं से शुद्ध करने के लिए यह परम शक्तिशाली एवं दिव्य विधि है। कृष्ण के विषय में जितना ही अधिक श्रवण किया जाता है, उतना ही मनुष्य उन वस्तुओं के प्रति अनासक्त होता है जो मन को कृष्ण से दूर ले जाने वाली हैं। मन को उन सारे कार्यों से विरक्त कर लेने पर, जिनसे कृष्ण का कोई सम्बन्ध नहीं है, मनुष्य सुगमतापूर्वक वैराग्य सीख सकता है, और वैराग्य का अर्थ पदार्थ से विरक्ति और मन का आत्मा में प्रवृत्त होना है। इस दौरान चित्रा वाष्र्णेय, मंजू अग्रवाल, संगीता अग्रवाल, संगीता, संगीता गर्ग, उत्तम वाष्र्णेय, अंजू वाष्र्णेय आदि मौजूद थे।

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