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आदिवासी चिकित्सीय परम्पराओं तथा भारत में एंथनो फार्माकोलोजी के विषय पर प्रसार व्याख्यान प्रस्तुत

अलीगढ़ 05 सितम्बरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडीकल कॉलेज के मेडीसिन संकाय में दिल्ली विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान के प्रोफेसर तथा सोसाइटी ऑफ इण्डियन एंथ्रोपोलोजी के अध्यक्ष प्रोफेसर पीसी जोशी ने आदिवासी चिकित्सीय परम्पराओं तथा भारत में एंथनो फार्माकोलोजी के विषय पर प्रसार व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का आयोजन जेएन मेडीकल कॉलेज के फार्माकोलोजी विभाग द्वारा किया गया।

प्रोफेसर जोशी ने देसी औषधीय परम्पराओं तथा आदिवासी औषधियों पर चर्चा करते हुए विभिन्न आदिवासियों द्वारा अपनाये जाने वाले अलग अलग रोगों की चिकित्सा के तौर तरीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आदिवासी लोग पीढ़ी दर पीढ़ी चिकित्सा के ऐसे तरीके अपनाते हैं जिनके बारे में लिखित रूप में कुछ भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के इन तरीकों का अध्ययन किया जाना चाहिये और यदि वह ठीक प्रतीत होते हों तो उन्हें मान्यता दी जा सकती है। उन्होंने आदिवासियों के चिकित्सा के तरीकों को लिखित रूप में लाने पर भी बल दिया।

चिकित्सा के परम्परारिक तरीकों की चर्चा करते हुए उन्होंने अवैध चिकित्सकों की चिकित्सीय सेवाओं पर टिप्पणी भी की।

इससे पूर्व कार्यक्रम के संयोजक फार्माकालोजी विभाग के प्रोफेसर सैयद जिया उर रहमान ने प्रोफेसर पीसी जोशी का परिचय कराते हुए बताया कि प्रोफेसर जोशी ने मानव विज्ञान के क्षेत्र में भारत में कई बड़े कार्य पहली बार किये हैं तथा उन्हें इन्दिरा प्रिय दर्शनी मित्र नेशनल एवार्ड तथा समाजिक विज्ञान में इंटर यूनीवर्सिटी सेंटर एसोसिएटशिप एवार्ड समेत विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

फार्माकोलोजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद नसीरूद्दीन ने अतिथि वक्ता सहित समस्त उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। फार्माकोलोजी विभाग के वरिष्ठ सेवानिवृत अध्यापक प्रोफेसर राहत अली खॉन ने अतिथि वक्ता को प्रतीक चिन्ह तथा विभाग की पुस्तकें भेंट की। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अध्यापक, रेजीडेंट तथा छात्र एवं छात्रायें मौजूद थीं।

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