Home > Agra > माॅरीशस में 18 अगस्त 2018 से 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन का आरम्भ

माॅरीशस में 18 अगस्त 2018 से 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन का आरम्भ

Azhar Umri 
माॅरीशस, गोस्वामी तुलसीदास नगर माॅरीशस में आज से लघुभारत कहे जाने वाले माॅरीशस में 18 अगस्त 2018 से 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन का आरम्भ हुआ हिन्दी का यह महाकुम्भ 20 अगस्त 2018 तक स्वामी विवेकानन्द अंतर्राष्ट्रीय सभा केन्द्र, माॅरीशस में चलेगा। विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन मुख्य रूप से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा किया जाता है। जिनमें इस बार माॅरीशस सरकार स्थानीय आयोजन करता है। 18 अगस्त 2018 को प्रातः 10ः00 बजे स्वामी विवेकानन्द अन्तर्राष्ट्रीय सभागार में उद्घाटन समारोह में भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने सम्मेलन की प्रस्तावना प्रस्तुत की और माॅरीशस के प्रधानमंत्री श्री प्रवीण कुमार जगन्नाथ ने उद्घाटन भाषण प्रस्तुत किया। इस 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारत की कई संस्थाओं द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई है।
रामपुर रज़ा लाइब्रेरी को भी इस अपने उत्कृष्ट प्रकाशनों के लिए हिन्दी सम्मेलन में प्रतिभागिता का अवसर प्राप्त हुआ है। इस पुस्तक प्रदर्शनी में रामायण, मधुमालती, प्रेमचंद के पत्र, तुलसीनामा, राजभाषा पत्रिका (प्रेमचंद विशेषांक), राजभाषा पत्रिका, हुमायूँनामा, रामपुर दरबार का संगीत एवं नवाबी रस्में, उमरा-ए-हिनूद, अंगदर्पण, रसप्रबोध, मालूशाही इत्यादि को प्रदर्शित किया गया है।
इस अवसर पर माॅरीशस के माननीय प्रधानमंत्री श्री प्रवीण कुमार जगन्नाथ ने कहा कि आज अवसर है कि जब हम उन सभी अभियानों को अपना भरपूर सर्मथन दें जो हिन्दी के विकास में योगदान दे रहे हैं तथा भारतवंशियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने में सहायता कर रही हैं एक सशक्त भाषा के रुप में हिन्दी का विकास पिछले एक हजार वर्षों से होता रहा है परन्तु संस्कृत की वंशधर होने के नाते हिन्दी के पास 3000 वर्षों से लम्बी सांस्कृति और साहित्यिक धरोहर है। ये भाषा सादियों से कई भाषाओं से मिलती, जुड़ती रही है। इस सम्पर्क से हिन्दी को एक समृद्ध और संयोजित भाषा बनने में सहायता मिली है। हिन्दी न केवल समृद्ध इतिहास वाली भाषा है बल्कि उसका भविष्य भी बहुत उज्ज्वल है। यदि हिन्दी इस उज्ज्वल भविष्य को लेकर हम में तनिक भी सनिध्य हो तो हम अपने चारों ओर देखें। उन्होंने कहा कि इस साल के आरम्भ में ही हिन्दी डेवुस की बर्फीली चोटियों पर चढ़ कर गूंजी, जब मोदी जी ने वल्र्ड इक्नाॅमिक फोरम के उद्घाटन में अपना बीज वक्तव्य हिन्दी में दिया। उनका सन्देश हिन्दी के लिए गर्व की बात थी। साथ ही यह भाषा की मान्यता का भी प्रमाण था। उनके सन्देश में दुनिया को यह संकेत दिया कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भी पूरी दुनिया और वैश्विकता को गले लगा सकते हैं। हमें इस बात की खुशी है कि भारत एक बहु-सांस्कृतिक विश्व में विश्वास करता है और उसके साथ यह भी मानता है कि विश्व की कोई एक ही धुरी नहीं हो सकती और इन सब के साथ भी भारत हिन्दी और उसकी कविता के समृद्ध इतिहास के प्रति अपनी रुचि कम नहीं होने देगा। यहाँ मैं रेखांकित करना चाहूँगा कि भारतीय भाषाएँ और विशेष रुप से हिन्दी, हमारे लिए भारतीय संस्कृति, साहित्य और मूल्यों के साथ एक गहरे सम्बन्ध का काम करती रही हैं। यह सम्बन्ध हमारे हृदय में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कहा कि भारत के सबसे प्रसिद्ध और अमर ग्रन्थ रामायण का माॅरीशस में फिल्मांकन दोनों देशों के बीच गहरे सम्बन्धों का एक और प्रमाण है। हिन्दी, माॅरीशस और भारत को बांधने वाला मजबूत धागा है।
इस अवसर माननीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि विश्व हिन्दी सम्मेलन की यात्रा 43 वर्ष पुरानी है। 1975 में पहला सम्मेलन भारत में नागपुर में हुआ था। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से हम भाषा को बचाने एवं बढ़ाने का प्रयास करें। इस सम्मेलन को भाषा के आगे के पड़ाव पर ले जाया जाये जो है संस्कृति। इसलिए सम्मेलन का विषय रखा हिन्दी विश्व और भारतीय संस्कृति।
प्रदर्शनी में रज़ा लाइब्रेरी द्वारा प्रकाशित रामायण, मधुमालती, प्रेमचंद विशेषांक एवं तुलसीनामा आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इस प्रदर्शनी में रज़ा लाइब्रेरी के तरफ से निदेशक रज़ा लाइब्रेरी प्रो० सैयद हसन अब्बास, लाइब्रेरी मीडिया प्रभारी श्री हिमांशु सिंह, प्रकाशन विभाग के प्रभारी श्री मोहम्मद ज़़फ़र खाँ सम्मिलित हुये।
इस सम्मेलन में देश विदेश के लगभग 3000 हज़ार से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर माॅरीशस की शिक्षामंत्री लीला देवी दुकन लघुमन, भारत के विदेश राज्यमंत्री जनरल वी० के० सिंह, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल तथा हिन्दी के वरिष्ठ कवि श्री केसरीनाथ त्रिपाठी, गोवा के राज्यपाल व लेखिका श्रीमती मदृला सिंहा इत्यादि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!