Home > Aligarh > कल्चर ऑफ क्रोनी कैपिटलिज़्म यानि बना मोदी सरकार का डीएनए

कल्चर ऑफ क्रोनी कैपिटलिज़्म यानि बना मोदी सरकार का डीएनए

नरेंद्र मोदी का ष्क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेमष् जगजाहिर….. विवेक बंसल

अलीगढ़ः- काग्रेस कमैटी के राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल पूर्व विधायक ने अपने कार्यालय अयोध्या कुटी मैरिस रोड पर आयोजित एक प्रैसवार्ता को संबोधित करते हुये कहा कि 60.145 करोड़ की राफेल डील ने साबित कर दिया कि ष्कल्चर ऑफ क्रोनी कैपिटलिज़्मष् यानि 3ब्श्े मोदी सरकार का डीएनए बन गया है। ष्झूठ परोसनाष् व ष्छल.कपट का चक्रव्यूह बुनष् देश को बरगलाना ही अब सबसे बड़े रक्षा सौदे में भाजपाई मूल मंत्र है। एक झूठ छिपाने के लिए सौ और झूठ बोले जा रहे हैं। वास्तविकता यह है कि 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की एकतरफा खरीद से सीधे.सीधे ष्गहरी साजिशष्ए ष्धोखाधड़ीष् व ष्सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के षडयंत्रष् की बू आती है। अब साफ है किरू.राफेल जहाज बनाने वाली कंपनीए डसॉल्ट एविएशन ने 13 मार्चए 2014 को एक ष्वर्कशेयर समझौतेष् के रूप में सरकारी कंपनीए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ;एचएएलद्ध से 36ए000 करोड़ रुण् के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए। परंतु प्रधानमंत्रीए श्री नरेंद्र मोदी का ष्क्रोनी कैपिटलिज़्म प्रेमष् तब जगजाहिर हो गयाए जब 10 अप्रैलए 2015 को 36 राफेल लड़ाकू जहाजों के खरीद की मोदी जी द्वारा की गई एकतरफा घोषणा के फौरन बादए सरकारी कंपनीए एचएएल को इस सबसे बड़े ष्डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् से दरकिनार कर दिया गया व इसे एक निज़ी क्षेत्र की कंपनी को दे दिया गया। प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री इसका कारण क्यों नहीं बता रहेघ् ष्डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् एक निजी कंपनीए रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को दे दिया गयाए जिसे लड़ाकू जहाजों के निर्माण का शून्य भी अनुभव नहीं। रिलायंस डिफेंस लिमिटेड का गठन फ्रांस में 10 अप्रैलए 2015 को प्रधानमंत्री जी द्वारा 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की खरीद की घोषणा किए जाने से 12 दिन पहले यानि 28 मार्चए 2015 को किया गया। रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के पास लड़ाकू जहाज बनाने का लाईसेंस तक नहीं था।आश्चर्य वाली बात यह है कि रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड को रक्षा मंत्रालय द्वारा लड़ाकू जहाजों के निर्माण का लाईसेंस तो दिया गयाए लेकिन 2015 में लाईसेंस का आवेदन देने व उसके बाद लाईसेंस दिए जाने की तिथिए 22 फरवरीए 2016 को इस कंपनी के पास लड़ाकू जहाज बनाने की फैक्ट्री लगाने के लिए न तो कोई जमीन थी और न ही उस पर कोई बिल्डिंग। आश्चर्य की बात यह भी है कि रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड का गठन 24 अप्रैलए 2015 यानि प्रधानमंत्री जी द्वारा 10 अप्रैलए 2015 को फ्रांस में 36 राफेल लड़ाकू जहाजों की खरीद की घोषणा करने के 14 दिन बाद ही किया गया था।चौंकाने वाले खुलासों एवं प्रमाणों से 30ए000 करोड़ रुण् का ष्डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् रिलायंस समूह को दिए जाने बारे रक्षामंत्रीए श्रीमती निर्मला सीतारमन की झूठ जगजाहिर हो जाती है। इसके अलावाए रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट दिशानिर्देशों का घोर उल्लंघन जगजाहिर है। रिलायंस समूह व डसॉल्ट एविएशन के 30ए000 करोड़ के ऑफसैट कॉन्ट्रैक्ट के सांझे समझौते को रक्षामंत्री व एक्विजि़शन मैनेजरए रक्षा मंत्रालय की अनुमति दिशानिर्देशों के मुताबिक अनिवार्य थी। पूरे मसौदे को डिफेंस एक्विजि़शन काउंसिल के समक्ष पेश करना भी जरूरी था। खुद मोदी सरकार ने ही रक्षा मंत्रालय के सभी दिशानिर्देशों की धड़ल्ले से धज्जियां उड़ा दीं।मोदी सरकार का 1ए30ए000 करोड़ रुण् का झूठ . ष्30ए000ष् करोड़ रुण् का ष्डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् एवं 1ए00ए000 करोड़ का ष्लाईफ साईकल कॉस्ट कॉन्ट्रैक्टष्रिलायंस डिफेंस लिमिटेड ने दावा किया है कि उसे ष्डसॉल्ट एविएशनष् से 30ए000 करोड़ रुण् का ष्ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् एवं 1 लाख करोड़ रुण् का ष्लाईफसाईकल कॉस्ट कॉन्ट्रैक्टष् मिल गया है। डसॉल्ट एविएशन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2016.17 में माना है कि ष्ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् का क्रियान्वयन ष्रिलायंस समूहष् कर रहा हैइन सब दावों के बावज़ूदए रक्षामंत्रीए श्रीमती निर्मला सीतारमन ने दिनांक 07ण्02ण्2018 को एक पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति में यह दावा कर दिया कि डसॉल्ट एविएशन द्वारा ष्ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट दिया ही नहीं गयाष्। क्या मोदी सरकार व रक्षामंत्रीए श्रीमती निर्मला सीतारमन झूठ नहीं बोल रहींघ् क्या रिलायंस समूह को 30ए000 करोड़ का डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट व 1ए00ए000 करोड़ का लाईफ साईकल कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मिला हैघ् 30ए000 करोड़ रुण् का ष्ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् देने में ष्डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट दिशानिर्देशोंष् का उल्लंघन.रक्षा मंत्रालय में एक स्थायी ष्डिफेंस ऑफसेट मैनेजमेंट विंगष् ;डीओएमडब्लूद्ध की स्थापना की गई है और सभी ष्ऑफसेट कॉन्ट्रेक्टोंष् के लिए ष्डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट दिशानिर्देशष् भी जारी किए गए है।सभी ऑफसेट प्रस्ताव रक्षामंत्री द्वारा स्वीकृत किए जाएंगेए ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट पर रक्षा मंत्रालय के ष्एक्विजि़शन मैनेजरष् के हस्ताक्षर जरूरी होंगे प्ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट की प्रगति का डिफेंस ऑफसेट मैनेजमेंट विंग के नामांकित अधिकारी द्वारा हर छः माह में ऑडिट कराया जाएगा।रक्षा मंत्रालय की ष्एक्विजि़शन विंगष् को हस्ताक्षर किए गए ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट एवं क्रियान्वयन की स्थिति के विवरण बारे ष्डिफेंस एक्विजि़शन काउंसिलष् को वार्षिक रिपोर्ट देनी होगी । किसी भी साल ऑफसेट नियमों का पालन न कर पाने की स्थिति में पूरे न किए गए ऑफसेट दायित्व के 5 प्रतिशत के बराबर दण्ड के साथ पेनल्टी लगाई जाएगी प्हम ये जानना चाहते हैं कि क्या रिलायंस एवं डसॉल्ट एविएशन 30ए000 करोड़ रुण् के ष्ऑफसेट कॉन्ट्रैक्टष् पर रक्षामंत्री की अनुमति के बिना हस्ताक्षर कर सकते हैंघ्क्या इस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट पर रक्षा मंत्रालय के ष्एक्विजि़शन मैनेजरष् ने हस्ताक्षर किएघ्डीओएमडब्लू द्वारा छः महीने में किया जाने वाला ऑडिट क्यों नहीं किया गयाघ्क्या ष्एक्विजि़शन विंगष् ने ष्डिफेंस एक्विजि़शन काउंसिलष् को अपनी वार्षिक रिपोर्ट जमा कराईघ् यदि नहींए तो इसका कारण क्या हैघ्क्या देश के एक बड़े रक्षा सौदे में किसी प्राईवेट कंपनी और रक्षा उपकरणों की सप्लायर को पूरे ष्डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट नियमोंध्निर्देशोंष् को ताक पर रखने की अनुमति हैघ्हाई सिक्योरिटी डिफेंस प्रोडक्शनष् के लिए औद्योगिक लाईसेंस बिना किसी भूमि या बिल्डिंग के दिया जाना भारत में रक्षा उत्पादन के लिए लाईसेंस इंडस्ट्रीज़ ;डेवलपमेंट एण्ड रेगुलेशनद्धए रजिस्ट्रेशन एण्ड लाईसेंसिंग ऑफ इंडस्ट्रियल अंडरटेकिंग रूल्सए 1952 और न्यू आर्म्स रूल्सए 2016 के तहत दिया जाता है प् रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड व उसकी संबंधित कंपनियों . रिलायंस डिफेंस लिमिटेड एवं रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड को लड़ाकू जहाज बनाने का कोई अनुभव नहीं। वास्तव में रिलायंस डिफेंस लिमिटेड का गठन प्रधानमंत्री जी द्वारा 10 अप्रैलए 2015 को फ्रांस में 36 लड़ाकू जहाज खरीदे जाने की घोषणा करने के केवल 12 दिन पहलेए यानि 28 मार्चए 2015 को किया गया था । रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के पास लड़ाकू जहाज बनाने का लाईसेंस तक नहीं था।रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड का गठन 24ण्04ण्2015 को किया गया था। कंपनी ने लड़ाकू जहाज बनाने के औद्योगिक लाईसेंस के लिए आवेदन सालए 2015 में दिया और इसे 22ण्02ण्2016 को वाणिज्य मंत्रालय द्वारा यह अनुमति दे दी गई। उस समय श्रीमति निर्मला सीतारमन वाणिज्य मंत्री थीं। लाईसेंसों का आवंटन करने से संबंधित सूची संलग्नक ।7 में दी गई है। इस कंपनी का गठन भी 24ण्04ण्2015 कोए यानि प्रधानमंत्री जी द्वारा 10 अप्रैलए 2015 को फ्रांस में 36 लड़ाकू जहाज खरीदे जाने की घोषणा करने के केवल 14 दिन बाद किया गया था।
लड़ाकू जहाज बनाने के लिए लाईसेंस के आवेदन में रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड ने अपना पता एवं स्थानए ष्सर्वे नंण् 589ए तालुका जफराबादए ग्राम लुंसापुरए जिला अमरेलीए गुजरातष् दिया था। उस समय ये परिसर रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड के स्वामित्व में नहीं थे। उपरोक्त स्थान की मल्कियत ष्पीपावाव डिफेंस एण्ड ऑफशोर इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेडष् के पास थी। लाईसेंस के दिनए यानि 22ण्02ण्2016 को भी रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड के पास उपरोक्त पते पर कोई जमीन या भवन नहीं था। पीपावाव डिफेंस लिमिटेड का अधिग्रहण रिलायंस डिफेंस लिमिटेड द्वारा 18ण्01ण्2016 को किया गया और उसके बाद इसका नाम बदलकर रिलायंस डिफेंस एण्ड इंजीनियरिंग लिमिटेड रख दिया गया। यह बात वार्षिक रिपोर्ट 2015.16 से साबित हो जाती है प् हम जानना चाहते है कि रिलायंस डिफेंस लिमिटेड का गठन प्रधानमंत्रीए श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 अप्रैलए 2015 को फ्रांस में 36 लड़ाकू जहाज खरीदे जाने की एकतरफा घोषणा करने के केवल 12 दिन पहले तथा रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड का गठन उसके केवल 14 दिन बाद किया गया थाघ्रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड के पास लड़ाकू जहाजों के निर्माण के लिए लाईसेंस का आवेदन दिए जाने के समय ग्राम लुसनापुर ;अमरेलीद्धए गुजरात में कोई जमीन नहीं थीघ् क्या यह बात सच है कि 22ण्02ण्2016 को औद्योगिक लाईसेंस प्राप्त होने के समय अमरेलीए गुजरात का परिसर रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड के मालिकाना हक का नहीं था और यह परिसर एक और कंपनी रिलायंस डिफेंस लिमिटेड द्वारा 18ण्01ण्2016 को खरीदा गयाघ् क्या इन सब बातों की पूरी जानकारी लिए बगैर वाणिज्य मंत्रालय द्वारा लड़ाकू जहाज बनाने का औद्योगिक लाईसेंस दिया जा सकता थाघ्एक झूठ छिपाने के लिए सौ झूठ बोलना मोदी सरकार का चालए चेहरा और चरित्र बन गया है। समय आ गया है कि प्रधानमंत्री देश को जवाब दें।जो जहाज यूपीए कांग्रेस सरकार 526 करोड़ रुपए में खरीद रही थीए वो आप 1ए670 करोड़ प्रति जहाज में खरीद रहे हैंए यानि लगभग 61 हजार करोड़ रुपए मेंए जबकि 66 हजार करोड़ में 126 जहाज आ जाते। 36 जहाज 61 हजार करोड़ रुपए में खरीद रहे हैंए क्योंघ् क्या इससे देश का नुकसान नहीं हो रहा हैघ् दूसरी और बड़ी सीधी बात ये है कि उसका जो ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट हैए वो भारत सरकार की अकेली तजुर्बेकार जहाज बनाने वाली कंपनी को मिला हैए उसे सुपरसीड क्यों किया गयाघ् तीसराए प्रधानमंत्री निजी हितों को प्रोटेक्ट करते हैं या सरकारी कंपनी या सरकार के हितों को प्रोटेक्ट कर रहे हैं। तीन बड़ी सीधी बातें हैं। और चौथाए डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट गाईडलाईन आपने बनाईए हमने नहीं बनाई। उनकी अनुपालना क्यों नहीं हो रहीघ् और आपके कैबिनेट मंत्री और उनके साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री उस ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट बनाने वाली निजी कंपनी की फैक्ट्री का उद्घाटन कर रहे हैं और आप ये प्रेस रिलीज जारी कर रहे हैं कि मुझे कोई जानकारी नहीं। ये देश कैसे चलेगाघ् क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर और देश की आजादी के बाद की सबसे बड़ी डिफेंस डील के मुद्दे पर इस प्रकार से खिलवाड़ और समझौता किया जा सकता है और हर मार्गदर्शिकाओं को दरकिनार किया जा सकता हैए प्रश्न ये हैघ्श्री बंसल ने कहा कि प्रधानमन्त्री जी का ये कहना है कि ष्ना खाऊँगाए ना खाने दूंगाष्ए का जवाब देना चाहिए जहाँ दाल में काला नहींए पूरी दाल काली हो गई है। प्रधानमंत्री देश को जवाब दें और जो राष्ट्रीय हितों के साथ खिलवाड़ हो रहा हैए राजस्व को जो हानि हो रही है और उसके साथ.साथ जिस प्रकार से सरकारी कंपनी के 36 हजार करोड़ के हितों को कूड़ेदान के अंदर फेंक दिया गया है और एक निजी कंपनी को अडॉप्ट ;ंकवचजद्ध कर लिया गयाए इसके बारे में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री जवाब देंघ्  प्रधानमंत्री की जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स की बैठक हुई हैए डोकलाम को लेकर एक बार फिर से चीन द्वारा दखल दिए जाने के समाचार आए हैंए श्री सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिका की कांग्रेशनल कमेटी ;न्दपजमक ैजंजमे ब्वदहतमेपवदंस ब्वउउपजजममद्ध में बकायदा ये बयान दिया गया कि डोकलाम में चीन ने अपनी बढ़त बना ली है और वो हर रोज और ज्यादा वहाँ पर सैन्य सामग्री व सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर इक्कठ्ठा कर रहा है। ये राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे.सीधे चुनौती भी है और खतरा भी। उत्तरी डोकलाम में जिस प्रकार की सैन्य सामग्री और इन्फ्रास्ट्रक्चर ब्रिगेड़ लेवल की हैए उसकी पूरी सेटेलाईट ईमेजरी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से हमने जारी की थी। जिसको पहले भारत सरकार की रक्षा मंत्री निर्मला जी ने इंकार किया और बाद में संसद के पटल पर उसे माना। उसके बाद दक्षिण डोकलाम में सिलीगुड़ी कॉरिडोरए जिसे ष्चिकन नेकष् भी कहते हैं और जो हमारे उत्तर पूर्व के प्रांतों की राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के जुड़ाव के लिए महत्वपूर्ण है। चीन ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक सड़क बना ली है। उसकी सेटेलाईट ईमेजरी जो अवेलेबल हैए गूगल अर्थ से लेकर बकायदा हमने आपको फिर जारी की। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने उसके बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं समझा। कटु सत्य ये है कि 56 ईंच की छाती वाले और चीन से लाल आँख दिखा कर बात करने का वायदा करने वाले मोदी जी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में पूरी तौर से चुप्पी साधे बैठे हैंए जब चीन नोर्थ और साउथ डोकलाम में सैन्य सामग्री और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है। सच्चाई ये भी है कि चीन को लाल आँख दिखाने वाले प्रधानमंत्री जी प्रधानमंत्री बनकर राष्ट्रपति चीन को झूला तो झुलाते हैंए कोई दिक्कत नहीं उसमें। परंतु जब एजेण्डा लेस विजिट पर चीन जाते हैंए तो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे डोकलाम को उठाना भूल जाते हैं। सच्चाई ये भी है कि चीन भूटान से जिनके उनके डिप्लोमेटिक रिलेशनशिप नहीं हैए उनके वाईस फॉरन मिनिस्टर पिछले 72 घंटे में भूटान जाते हैं और भारत की गैर.मौजूदगी में बगैर भारत को शामिल किएए भूटान से डोकलाम पर वार्तालाप करते हैं और हमारे प्रधानमंत्री चुप रहते हैं। सच्चाई यह भी है कि देश की रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री दोनों एजेण्डा लेस विजिट से पहले चीन जाती हैंए पर डोकलाम पर एक शब्द नहीं बोल पाती हैं। सच्चाई यह भी है कि ब्रिक्स समिट की साईड लाईन पर प्रधानमंत्री फिर चीन के राष्ट्रपति से वार्तालाप करते हैंए पर डोकलाम की बात करना फिर भूल जाते हैं। ये सरकार 56 ईंच का सीना और लाल आँख कब दिखाएगी और इस देश की सीमाओं की और इसए देश के सामरिक दृष्टि से जुड़े मुद्दों पर साहस कब दिखाएगीघ् ये 132 करोड़ लोग जानना चाहते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!