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आशियाना तो बनवा दो साहब

नीरज चक्रपाणि,सासनी- सरकार भले ही विकास कार्रों का हवाला देकर अपनी पीठ ठोक लें गरीबी दूर करने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी कर ले मगर आज भी लोग मुफिलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर है। लोगों के कच्चे घर में छत भी पानी में बह गई है।
ऐसा ही मामला गांव समामई में ऐसा ही प्रेमपाल का परिवार भी इसी प्रकार अपनी गुजर बसर कर रहा हैं। प्रेमपाल का उसी पत्नी से करीब सात वर्ष पूर्व तलाक हो गया। अब तलाकशुदा गुडिया अपने दो बेटी और एक बेटे के साथ टूटे और कच्चे मकान में रहकर अपने मायके में गुजर बसर कर रही है। गुडिया ने बताया कि उसकी समस्या का समाधान करने के लिए प्रशासन से लेकर शासनिक अधिकारियों ने भी कभी सुध नहीं ली है। जनप्रतिनिधियों का हाल यह है कि जब भी मतदान का समय आता हैं तभी नेता वोट लेने आ जाते है। मगर जीतने या हारने के बाद उनके दर्शन भी नहीं होते। कई बार प्रधान से भी शिकायत की मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा तहसील दिवस में भी शिकायत कर चुकी है। मगर उसकी कोई सुनने वाला नहीं है। बरसात होने के कारण अब उसकी छत भी चूने लगी है। जिससे उसका घर में रहना बहुत ही मुश्किल हो गया है। गुडिया ने प्रशासनिक अधिकारियों से अपने मकान के मरम्मत कराए जाने की गुहार लगाई है।

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