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“मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ: जीवन और कृतित्व“ पर प्रोफेसर अख़्तर-उल-वासे ने किया व्याख्यान प्रस्तुत

Azhar Umri 
रामपुर, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी के सभागार में मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ मैमोरियल प्रथम विस्तार व्याख्यान “मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ: जीवन और कृतित्व“ पर मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलपति प्रोफेसर अख़्तर-उल-वासे ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर इक़तेदार मुहम्मद ख़ाँ, इस्लामिक अध्ययन विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली ने की। इस अवसर मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ के पुत्र श्री नासिरउद्दीन खाँ एवं समस्त परिवार मौजूद रहा।
इस अवसर पर यादगारनामा मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ लेखक प्रो० सैयद हसन अब्बास, रूहेलखण्ड के सूफीयाना अदब का तनक़ीदी मुतालेआ-लेखक डाॅ० मज़हरी सिद्दीक़ा एवं बा-ख़्यालतु-लेखक डाॅ० सैयद नक़ी अब्बास कै़फी इत्यादि किताबों का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ डाॅ० अनवारूल हसन कादरी की तिलावते कुरान एवं सैयद नवेद कैसर की नाते-पाक से हुआ।
इस अवसर पर प्रोफेसर अख़्तर-उल-वासे ने अपने विस्तार व्याख्यान में मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ के जीवन और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब्दुस्सलाम खाँ वर्तमान समय में इस्लामी दर्शन के महान व्यक्तित्व हैं। मौलाना को दबिस्तान-ए-रामपुर के महत्त्वपूर्ण स्तम्भों में एक बताया है और कहा कि उन्होंने इस अवसर पर अपनी किताबों और लेखों के माध्यम से इब्ने अरबी, मौलाना रूमी और अल्लामा इक़बाल इत्यादि का परिचय और बेहदातुल वजूद का वर्णन किया तथा अफ़कार-ए-रूमी और अफ़कार-ए-इक़बाल अपने समय की उनकी महत्वपूर्ण किताबें हैं। अफ़कार-ए-इक़बाल 1991 में प्रकाशित हुई और यह किताब इक़बाल शानासी में संगे मील का स्थान रखती है। इस्लामिक दर्शन पर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की सलाह पर अरबी में “अलफलसफातुल हिन्दिया अल कदीमा“ किताब की रचना की। वासे साहब ने कहा कि मौलाना को अरबी, फारसी, उर्दू और अंग्रेजी-हिन्दी के अतिरिक्त जर्मनी, फ्रांसीसी जुबानों पर भी महारत हासिल थी। उन्होंने निटसे की किताब का जर्मनी से उर्दू में अनुवाद भी किया। उनके गुरु मौलाना फज़ले हक़ ख़ैराबादी और बेटे मौलाना अब्दुल हक़ ख़ैराबादी और मौलाना फज़ले हक़ रामपुरी जैसे अहम नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मदरसे आलिया जो कि अपने समय कीएक ऐसी शैक्षिक संस्था है जिसको नवाबी रामपुर ने स्थापित किया और जिनमें मुल्ला अब्दुल अली बहरूल उलूम, मौलाना फज़ले हक़ ख़ैराबादी , मौलाना अब्दुल हक़ ख़ैराबादी और मौलाना फज़ले हक़ रामपुरी जैसे बड़े उस्ताद शिक्षा देते थे उसमें मौलाना ने शिक्षा प्राप्त की और अध्यापक भी रहे और आखिर में प्राचार्य के पद पर भी रहे।
इस अवसर पर रामपुर रज़ा लाइब्रेरी के निदेशक प्रो० सैयद हसन अब्बास ने अपने स्वागत भाषण में प्रो० अख़्तर-उल-वासे, प्रो० इक़तेदार मुहम्मद खाँ और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सिलसिला जो मौलाना इम्तियाज़ अली अर्शी से शुरू हुआ था अब अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। इस सिलसिले में आज इल्मी व्यक्तित्व मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ पर एक यादगार व्याख्यान आयोजन और उनकी किताब “यादगारनामा“ का भी विमोचन किया गया है। उन्होंने कहा कि आगे भी राजयज़दानी असर रामपुरी, नज़मुल ग़नी खाँ रामपुरी इत्यादि भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा मौलाना शहर रामपुर की उन बड़ी विभूतियों में से हैं। मौलाना 17 मार्च 1917 को रामपुर में पैदा हुये और 13 अप्रैल 2009 को लगभग 92 वर्ष की उम्र में इंतिकाल कर गये।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर इक़तेदार मुहम्मद ख़ाँ ने कहा कि निदेशक रामपुर रज़ा लाइब्रेरी धन्यवाद के हक़दार हैं। उन्होंने मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ पर व्याख्यान का आयोजन किया और उनके द्वारा लिखित किताब का विमोचन हिन्दुस्तान की इल्मी, साहित्यिक, प्रसिद्ध व्यक्तित्व प्रो० अख़्तर-उल-वासे साहब के कर-कमलों द्वारा करवाया और और अपनी यह राय दी कि इन तरह के व्याख्यानों का आयोजन आगे भी जारी रहना चाहिए।
इस अवसर पर मौलाना अब्दुस्सलाम खाँ के पुत्र श्री नासिरउद्दीन खाँ, एडवोकेट एवं उनकी बहू श्रीमती साजिदा शेरवानी ने विचार व्यक्त किये और लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष माननीय राज्यपाल उत्तर प्रदेश, निदेशक रज़ा लाइब्रेरी, कुलपति प्रो० अख़्तर उल वासे साहब, प्रो० इक़तेदार मुहम्मद खाँ और लाइबे्ररी स्टाफ का अपने और परिवार की ओर से सहृदय धन्यवाद व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डाॅ० अबुसाद इस्लाही, लाइब्रेरी एवं सूचना अधिकारी ने किया तथा कार्यक्रम के अन्त में सभी का धन्यवाद व्यक्त किया।
इस अवसर पर श्री मुमताज़ अर्शी, श्री अज़हर इनायती, श्री शक़ील ग़ौस, श्री सरदार जावेद खाँ, बेहदत यार खाँ, अब्दुल अहद फुरकानी, सईद रामिश, ख़लीउन निशा बेगम, डाॅ० किश्वर सुल्ताना, श्री फ़हीम इक़बाल, श्री अतीक़ जिलानी, कारी हशीम शमसी, मौलाना असलम क़ासमी, सैयद फज़ीलत इत्यादि कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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