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कनिष्क हत्याकांड का हुआ पर्दाफाश, फिरौती के लिये कराया अपहरण हत्या में शामिल चार दबोचे

पुलिस दबाव के चलते हुई कनिष्क की हत्या,

Rajeev GAUTAM 
खैर। सहायक पुलिस अधीक्षक रोहन बोत्रे के कुशल निर्देशन में 102 दिन वाद क्राइम ब्रांच ने उसरम निवासी कनिष्क हत्याकांड का पर्दाफाश किये जाने का दावा करते हुये चार आरोपियों को जेल भेजा है। पुलिस की मानें तो चारों नामजद आरोपियों ने फिरौती के लिये कनिष्क का अपहरण व हत्या किया जाना स्वीकार किया है।

पुलिस टीम के साथ कनिष्क की हत्या के चार आरोपी

बता दें कि जलसेना में तैनात उसरम निवासी सोहन लाल के ढाई वर्षीय पुत्र कनिष्क का 9 फरवरी को अपहरण हो गया था। दसवें दिन लापता कनिष्क का शव गांव के तालाब में पडा मिला था। घटना का खुलासा करने में नाकाम रही एसओजी, सर्विलांश व खैर पुलिस के बाद मुकदमे की विवेचना पीडित फौजी के निवेदन पर एसएसपी अलीगढ ने क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दी थी। पिछले कुछ दिनों से क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर खैर पुलिस के साथ विवेचना में जुटे थे। मंगलवार को एएसपी रोहन बोत्रे की मौजूदगी में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रामराज यादव ने राकेश पुत्र बनवारी व उमेश पुत्र जीतराम निवासी उसरम, सुखराम पुत्र भूदेव निवासी जलालपुर अलीगढ व पुष्पेन्द्र पुत्र बाबू लाल निवासी मोरना गभाना को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया। पुलिस की मानें तो आरोपियों ने मोटी रकम की फिरौती हेतु कनिष्क का अपहरण किया तथा पुलिस के दबाव के चलते कनिष्क की गला घोंटकर हत्या कर शव को गांव के तालाव में डाल दिया था। हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम में क्राइम बं्राच के इंस्पेक्टर रामराज यादव, दरोगा राजेश बाबू यादव, हरेन्द्र मलिक,अरविंद कुमार व नरेन्द्र सिंह मौजूद रहें। एएसपी रोहन बोत्रे ने बताया कि आरोपियों को पकडने वाली टीम को घोषित पचास हजार रूपये का इनाम दिया जायेगा।
बौक्स में लगा देना
आरोप : निर्दोष भेजे जेल
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खैर। खैर पुलिस के सहयोग से क्राइम ब्रांच द्वारा कनिष्क हत्याकांड के खुलासे को लेकर ग्रामीणों में पुलिस के प्रति खासी नाराजगी है। पुलिस द्वारा पकडे गये लोगों के परिजन व ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिन पूर्व पूछताछ हेतु बुलाये गये राकेश आदि के साथ जमकर मारपीट की गई है। जिसमें सुखवीर सहित अन्य के शरीर पर चोंटों के निशान भी मौजूद है। वहीं पुलिस कस्टडी में मौजूद सुखराम ने बताया कि पूछताछ के लिये पुलिस द्वारा बुलाया गये थे और थर्ड डिग्री इस्तेमाल कर जबरिया कनिष्क की हत्या की बात कहलवाई है। जो सरासर गलत है। उनके द्वारा मासूम कनिष्क की हत्या नही की गई है। साथ ही उनकी फोन लोकेशन भी पुलिस की कहानी से मेल नही खा रही है। फौजी के दबाव में उनको झॅूठा व निर्दोष फंसाया गया है।

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