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जिला स्तरीय कानूनी समीक्षा की मांग

Neeraj Chakrpani 
हाथरस-22 मार्च। कानूनी सेवा केन्द्र भारतीय नागरिक कल्याण एवं अपराध निरोधक समिति के सामाजिक एवं विधिक कार्यकर्ताओं तथा जनपदीय जनमंच से जुड़ी सामाजिक संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के मामलों में उत्पीड़न निवारक कानून का दुरूपयोग रोकने के लिये जारी दिशा निर्देशों का स्वागत करते हुये मांग की है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को 3 किश्तों में मुआवजा देने की व्यवस्था को दो किश्तों में किया जाये। प्रथम किश्त अभियोजन एजेन्सी द्वारा आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करने पर तथा द्वितीय किश्त न्यायिक निर्णय के बाद दी जाने से दुरूपयोग तथा झूंठे मामलों पर नियंत्रण हो सकेगा।
आज की परिस्थितियों में महिलाओं के हित संरक्षण हेतु बने कानूनों का भी कुछ शरारती तत्व अनुचित लाभ लेकर भले लोगों को ब्लैकमेल करने अथवा शत्रुता से दूसरे पक्ष को नीचा दिखाने अथवा सम्पत्ति प्राप्त करने या अपनी बात बलपूर्वक मनमाने को कह रहे हैं। न्यायालय और पुलिस प्रशासन को इस प्रकार के मामलों में कानून का दुरूपयोग रोकने के लिये कार्यवाही की जानी चाहिये।
संस्था द्वारा विभिन्न कानूनों के दुरूपयोग रोकने के लिये विशेषतः गिरोह बन्द तथा गुण्डा एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का राजनैतिक स्तैमाल और पुलिस प्रशासन द्वारा विधि विरूद्ध प्रयोग करने को रोकने हेतु जनपद हाथरस में सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से मांग की जाती रही है।
कानूनविदों और विधायिका के जिम्मेदार लोगों, प्रबुद्ध नागरिकों और मीडिया कर्मियों से मांग की गई है कि प्रत्येक कानून का सदुपयोग कराने तथा दुरूपयोग रोकने हेतु जिला स्तरीय समीक्षा कराकर नियमित कार्यवाही की आवश्यकता है। किन्तु कानूनों के धरातलीय क्रियान्वयन के लिये प्रभावी समीक्षा और सुधार न होने के कारण कानून के उद्देश्य तथा आमजन का हित प्रवाहित हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना करते हुये हरीश कुमार शर्मा एड., डा. हरिश्चन्द्र, ओ. पी. शर्मा, अजय शर्मा, रामगोपाल दीक्षित, सुरेन्द्रपाल शर्मा ‘कबाड़ी बाबा’, गिर्राजकिशोर शर्मा, नरेन्द्र पचौरी, श्रीनिवास दीक्षित, सतीश शर्मा, तरूण शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किये।

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