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गिरिराज पर्वत ही गोविन्द जी हैं-रसिक महाराज

Neeraj Chakrpani 
हाथरस-13 मार्च। घण्टाघर स्थित मंदिर श्री गोविन्द भगवान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गोवर्धन पूजा का प्रसंग बहुत मनोहारी रहा। व्यासाचार्य श्री गोपाल जी रसिक के मुखारबिंद से हो रही अमृत वर्षा के दौरान उन्होंने श्री गोवर्धन लीला का बहुत ही मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया। श्री रसिक जी ने कहा कि गोवर्धन कोई मामूली पर्वत नहीं है अपितु यह साक्षात श्री गोविन्द जी का दूसरा रूप है। श्री गिर्राज पर्वत धारण कर अपना दूसरा रूप पूजा के योग्य प्रस्तुत किया है।
जब इन्द्र ने समस्त ब्रज मण्डल में अपनी पूजा का आव्हान किया तो नन्दलाल श्री कृष्ण ने देखा कि ब्रजवासी इन्द्र के भय के कारण उसकी पूजा करने को विवश है तो उन्होंने ब्रजवासियों से गोवर्धन स्वरूप की पूजा करने को कहा तो ब्रजवासी राजी हो गये जब इन्द्र ने देखा कि ब्रजवासी मेरी पूजा न कर किसी और देवता की पूजा में लीन होते जा रहे हैं तो ब्रजवासियों को भयभीत करने हेतु घनघोर वर्षा कर दी तो ब्रजवासियों ने कन्हैया को पुकारा है। तब श्री कृष्ण जी ने अपनी उंगली के नख से गोवर्धन पर्वत को उठा लिया जिससे समस्त ब्रजवासियों की वर्षा को पानी की प्रबल धार से रक्षा की। इसे देख इन्द्र को समझ आ गया कि यह तो कोई श्री हरि का ही अवतार हो और वह श्री कृष्ण भगवान की शरणागत हो गया। इस प्रकार इन्द्र का मान मर्दन करते हुए श्री कृष्ण जी ने अपनी परम भक्त रूक्मणि के साथ विवाह संस्कार सम्पन्न किया।
इस अवसर पर संजीव वार्ष्णेय एड., राजेश गुप्ता, निर्मल वार्ष्णेय, हरिनाम दास सांचा, राघव वार्ष्णेय, आकाश शर्मा, लालो पंडित, वीरेन्द्र पाठक, कौशल किशोर गुप्ता, जगदीश प्रसाद गुप्ता, संजीव पनीर वाले, दाऊदयाल, प्रदीप गुप्ता, हृदेश कुमार, दाऊदयाल टिम्बर वाले, शंकरलाल भगतजी, गंगा शरण मैदा वाले, बांकेबिहारी, सतीश चन्द्र गुप्ता आदि बडी संख्या में भक्तजन शामिल थे।

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