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श्री श्री रविशंकर के ख़िलाफ़  F I R दर्ज करने लिए दिया शिकायत प्रार्थना पत्र

Azhar Umri 
आगरा ,ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के जिला अध्यक्ष अल्हाज़ मुहम्मद इदरीस अली ने आध्यात्मिक गुरु एव आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के ख़िलाफ़  F I R दर्ज करने लिए शिकायत प्रार्थना पत्र दिया, इस सम्बन्ध में अल्हाज़ मुहम्मद इदरीस अली ने कहा कि आज हमने  आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के खिलाफश्रीमान वरिष्ट पुलिस अधीक्षक महोदय को F I R दर्ज करने लिए शिकायत प्रार्थना पत्र दिया गया है, क्योंकि आध्यात्मिक गुरु एव आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने दिनाँक 05/03/2018 को न्यूज चैनल CCN NEWS 18 अपने दिए गये साक्षात्कार में ऐसा विवादित बयान दिया था जो कि भारतीय एकता अखण्डता के लिए बड़ा ख़तरा है श्री श्री रविशंकर दुआरा दिया गया विवादित बयान जो कि धार्मिक उन्माद फैलाने वाला है अपने साक्षात्कार के दौरान श्री श्री रविशंकर ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति ऐसा वक्तव्य दिया जो कि न्यायालय की अवहेलना की परिधि में आता है श्री श्री रविशंकर द्वारा धमकी भरे अंदाज में कहा अयोध्या के बाबरी मस्जिद वाले बहुचर्चित विवाद को न्यायालय के बाहर नही सुलझाने पर जोर दिया है और कहा है कि मुस्लमान स्वेच्छा से बाबरी मस्जिद वाली जगह राम मंदिर को दे दे अन्यथा भारत मे भी सीरिया जेसे हालात हो जाएंगे। अगर मंदिर विवाद न सुलझा तो भारत सीरिया बन जायेगा।
ज़िला अध्यक्ष ने यह भी कहा कि श्री श्री रविशंकर ने उपरोक्त बयान अपने प्राख्यात आध्यत्मिक गुरु होने के नाते जानबूझकर भारत जेसे लोकतंत्र देश की धर्म निरपेक्षता को खण्डित करने के उद्देश्य से तथा दंगे इत्यादि भड़काने के उद्देश्य से व समुदाय विशेष को डराने व धमकाने के उद्देश्य दिया गया था साथ श्री श्री रविशंकर द्वारा उपरोक्त विवादित बयान देकर माननीय सर्वोच न्यायालय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया गया है
ज़िला अध्यक्ष ने यह भी कहा कि श्री श्री रविशंकर अयोध्या पर विवादित बयान देकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते चाहते थे जिसकी वजह से हिन्दू मुस्लिम एकता में दरार पड़ी है
श्री श्री रविशंकर का यह विवादित बयान कृत्य भारतीय दण्ड संहिता की धारा 153,153ए व 153बी के अंतर्गत आता है
इस लिए आज हमने श्रीमान वरिष्ट पुलिस अधीक्षक शिकायत प्रार्थना पत्र दिया है अगर इस पर कोई कार्यवाही नही होती है फिर हमें मजबूरन न्यायालय का दरबाजा खटखटाना पड़ेगा।

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