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महिला हो तुम , सशक्त बनो…

महिला दिवस पर तनु चतुर्वेदी की खास पेशकश ,

 

महिला हो तुम सशक्त बनो और क्रांति लाओ ….

कभी माँ बनकर उस बेटे को संभालती हो ।

चूल्हे के धुएं में उसे खाना बना के खिलाती हो ।

फिर क्यों बुढ़ापे में अपमान सहन करती हो ।

उस बेटे की तरह बेटी को भी पढ़ाओ ।

महिला हो तुम , सशक्त बनो……..
कभी बेटी बन कर ,

 

घर में किलकारी मारती हो ।

फिर क्यों अपनी तमन्नाओं को मन में दबाती हो ।

अपनी आवाज़ को बुलंद बनाओ ।

पढ़ लिखकर माँ – पापा का मान बढ़ाओ ।

महिला हो तुम , सशक्त बनो……
कभी बहन बन कर ,

 

भाई की कलाई में रखी बांधती हो ।

फिर बिना मर्ज़ी के ही व्याह दी जाती हो ।

अपनी आवाज़ को बुलंद बनाओ ।

बेख़ौफ़ खुले आसमां में उड़ जाओ ।

महिला हो तुम  , सशक्त बनो……
कभी पत्नी बन कर ,

 

अनजाने घर को सजाती हो ।

फिर क्यों उन्ही अपनों से मार कहती हो ।

उस मुँहबोले अपने घर में कैद हो जाती हो ।

उन अपनो में अपना मान बढ़ाओ ।

खुद अपनी बेटी हो बचा कर पढ़ाओ ।

महिला हो तुम , सशक्त बनो…….

 

आज तुम पायलट और सेनानी बन रहीं हैं ।

तुम अभी भी अपनी शान बढ़ाओ ।

पढ़ लिखकर नाम कमाओ ।

ज़िन्दगी के मनचलों को सबक सिखाओ ।

यूँ ही प्रगति पथ पर चलती जाओ ।

महिला हो तुम , सशक्त बनो…….

– तनु चतुर्वेदी

 

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