Home > Aligarh > पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता असमां जहाँगीर मानवता की प्रतीक थीः मिल्ल्त बेदारी

पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता असमां जहाँगीर मानवता की प्रतीक थीः मिल्ल्त बेदारी

असमां जहाँगीर ने सदैव पाकिस्तानी आतंकवाद और आई०एस०आई०एस० का विरोध कियाः डॉ० जसीम मोहम्मद

अलीगढ़ 13.02.2018ः पाकिस्तान की वरिष्ट अधिवक्ता और मानवधिकार कार्यकर्ता असमां जहाँगीर का आसमयिक देहान्त वर्तमान परिस्थियों में न केवल पाकिस्तान के लिए बल्कि मानवता के उच्च मूल्यों के भी एक दुखदयी घटना है। जिसकी क्षति पूरी नहीं की जा सकती उक्त बातें प्रोफेसर रज़ाउल्लाह खान, अध्यक्ष मिल्लत बेदारी मुहिम कमेटी (एम०बी०एम०सी०) द्वारा असमां जहाँगीर के 66 वर्ष मे देहान्त पर मीडिया सेन्टर अलीगढ़ में आयोजित एक शोक सभा की अध्यक्षता करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि असमां जहाँगीर सदैव पाकिस्तान मे सेना के शासन और आतंकवाद पर मुखर रहीं।मिल्लत बेदारी के निदेशक डॉ० जसीम मोहम्मद ने कहा कि असमां जहाँगीर एक निडर मानवाधिकार कार्यकर्ता थी और उन्होंने पाकिस्तान की आई०एस०आई० की गातिविधियों का भी सदैव विरोध किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में असमां जहाँगीर पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग की संस्थापक सदस्यों मे से एक ही नहीं थी बल्कि वे आयोग की अध्यक्ष भी रहीं। केवल यही नहीं जनरल ज़िया उल हक के सैन्य शासन के दौरान उन्होंने पाकिस्तान मे लोक तन्त्र की बहाली के लिए संघर्ष किया जिसके कारण उन्हें 1983 मे जेल भी जाना पड़ा। डॉ० जसीम मोहम्मद ने कहा कि उन्हें असमां जहाँगीर से नई दिल्ली मे सन 2015 मे भेंट का अवसर प्राप्त है। उन्होंने बताया कि असमां जहाँगीर से वह बहुत प्रभावित हुए क्योंकि वह मानवाधिकारी के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित थी और इसलिए उन्हें वर्ष 1992 में अमेरीकन बार एसोशिएशन द्वारा इन्टरनेशनल हयूमन राईटस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।समाजसेवी निकहत परवीन ने कहा कि असमां जहाँगीर पाकिस्तान की एक वरिष्ट अधिवक्ता भी थी और उन्होंने इफतेखार चौधरी को पाकिस्तान का मुख्य न्यायधीष नियुक्त करने के लिए वकीलों के संघर्ष का नेतृत्व किया था।अमुवि कोर्ट सदस्य प्रोफेसर हुमायू मुराद ने कहा कि असमां जहाँगीर ने सदैव पाकिस्तानी शासकों द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने का विरोध किया। केवल यही नहीं वे पाकिस्तान के धर्मान्दता के भी विरोध मे रही।दीबा अबरार ने कहा कि असमां जहाँगीर ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के अधिकारो के लिए निरन्तर संघर्ष किया तथा सदैव जेहादी मानसिक्ता के निशाने पर रही।शोक सभा के अन्त में मिल्लत बेदारी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके असमां जहाँगीर के देहान्त पर दुख प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शान्ति के लिए दुआ की।बैठक में बड़ी संख्या मे शिक्षकों, शोध छात्रों और मानवाधिकार कार्यकार्ताओं के अलावा प्रमुख रूप से दिलशाद कुरैशी, जमाल अंसारी, रिहाना रहीम आदि भी उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!