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समाज सुधारक थे दयानंद सरस्वती-मीता कौशल

नीरज चक्रपाण,सासनी- दैनिक यज्ञ करना हर आर्य का कर्त्तव्य है। परमाणुओं को न कोई बना सकता है, न उसके टुकड़े ही हो सकते हैं। यानी वह अनादि काल से हैं। उसी तरह एक परमात्मा और हम जीवात्माएं भी अनादि काल से हैं। परमात्मा परमाणुओं को गति दे कर सृष्टि रचता है। आत्माओं को कर्म करने के लिए प्रेरित करता है।यह विचार सोमवार को दयानंद बाल मंदिर सासनी में मनाए गये विद्यालय के वार्षिकोत्सव के दौरान मुख्यातिथि के रूप में मौजूद री रामेश्वर दयाल महाविद्यालय हाथरस की प्रचार्या डा. मीता कौशन ने प्रकट किए। उन्होंने दयानंद सरस्वती को आर्य समाज का संस्थापक और समाज सुधारक बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि द्वारा स्वामी दयानंद सरस्वती के छविचित्र के सामने दीप जलाकर एवं माल्यार्पण कर किया। इस दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्रक्रम प्रस्तुत किए। मुख्यातिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद के.एल जैन इंटर कालेज पूर्व प्रधानाचार्य केएम शर्मा व नगर पंचायत अध्यक्ष लालता प्रसाद माहौर ने बच्चों को पुरस्कृतकर उत्साहवर्द्धन किया। वहीं केएम शर्मा ने बच्चों को स्वामी जी के बताए मार्ग पर चलने और सत्यता के साथ जीने को प्रेरित किया। इस दौरान विद्यालय प्रबंधक डा. अमित भार्गव, नरेश चंद्र लवानियां, वेद प्रकाश भार्गव, दिनेश चंद्र लवानियां, निर्मल वाष्र्णेय, अजय श्रोती, बनवारी लाल वर्मा, नरेन्द्र शर्मा, एवं िवद्यालय प्रधानाध्यापिका श्रीमती रजनी आदि मौजूद थे। कार्रक्रम का संचालन अल्का लवानियां ने किया।

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