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युद्ध स्मारकों को जातीय चश्में से न देखा जाए – सुशील स्वतंत्र 

सुशील स्वतंत्र  नया साल हर तीन सौ पैंसठ दिनों के बाद आ जाता है लेकिन 2018 के पहले दिन को हम इस लिहाज से अलग कह सकते हैं कि इस दिन ने देश के दो युद्ध स्मारकों को भी जातीय बहस का हिस्सा बना डाला| 200 वर्ष पहले 500 महारों की ब्रिटिश सैन्य टुकड़ी ने हजारों पेशवा सैनिकों को धूल चटाकर मराठा शासन को इस देश से खत्म किया था| उन वीर लड़ाकों की याद में अंग्रेजों ने वैसा ही युद्ध स्मारक भीमा कोरेगांव में ‘जय स्तंभ’ (विक्ट्री पिलर) के नाम से बनाया जैसा देश की राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट के नाम से बनवाया गया है| यह अंग्रेजों की परम्परा रही है| ऐसे विजय के प्रतीक देश के अन्य स्थानों पर आज भी मिल जाएंगें| दिल्ली के नजदीक नॉएडा के गाँव छलेरा में भी ऐसा ही एक युद्ध स्मारक है जिसे स्थानीय लोग ‘विजय गढ़’ कहते हैं| युद्ध में शहीद सैनिकों के गाँव के आस-आस ब्रिटिश हुकूमत ऐसे स्मारकों का निर्माण करवा दिया करती थी| 1 जनवरी 1818 को छोटी सी महार सैन्य टुकड़ी द्वारा अनुशासित, प्रशिक्षित और सुसज्जित मानी जाने वाली विशाल पेशवा सेना पर प्राप्त किए गए विजय के भारत के दलित समाज के लिए अनेक मायने हैं| 19वीं सदी के पेशवा राज में दलितों की सामाजिक स्थिति को समझे बिना, कोरेगांव विजय का दलितों के लिए महत्त्व को नहीं समझा जा सकता है| भारतीय इतिहास का यह वही कलंकित दौर था जब जाति विशेष के लोगों के गले में हांडी और कमर में झाड़ू बंधा होता था| जब जाति को छिपाना अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता था| पेशवा शासकों द्वारा इंसानों के एक समुदाय को अछूत घोषित कर उनपर लम्बे समय से शोषण और भेदभाव किया जा रहा था| भीमा कोरेगांव विजय ने इस देश से पेशवा राज का अंत कर अंग्रेजी हुकूमत को बहाल किया| भारत का दलित समाज आज भी 1 जनवरी को क्रूर पेशवाओं पर प्राप्त विजय के दिन को ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाता है| यहां यह समझना बहुत जरूरी है कि यह महज जातीय कारणों से नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से सामाजिक कारणों की वजह से किया जाता है| अपमान और अमानवीयता के जीवन से मुक्ति पाने के लिए और सम्मान व स्वतंत्रता हासिल करने के लिए दुनिया में अनेक क्रांतियां हुयीं हैं| भीमा कोरेगांव में निर्मित जय स्तंभ (विक्ट्री पिलर) पर हर साल 1 जनवरी को हजारों की संख्या में न सिर्फ दलित बल्कि मराठा, मुस्लिम, प्रगतिशील, बौद्ध और ओबीसी समुदाय के लोग शौर्य दिवस मनाकर 1818 युद्ध के उन महार लड़ाकों को सम्मान देने के लिए एकत्रित होते हैं| यह एक सच है कि भीमा कोरेगांव भारत की एक बड़ी आबादी के लिए तीर्थ बन चुका है लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि इस देश की मुख्यधारा की मीडिया इसकी घोर अनदेखी करता चला आया है| नववर्ष की चकाचौंध भरी खबरों, अपराध की घटनाओं, छलकते जामों और गैर-जरूरी न्यू इयर सेलिब्रेशंस के लिए जितना ‘स्पेस’ भारत की प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में दिया जाता है, उसके मुकाबले भीमा कोरेगांव की मुक्तिगाथा के लिए स्थान नगण्य रहा है| इस वर्ष तो मीडिया ने हद्द तब कर डाला जब अनेक अखबारों और वेबसाइट पर यह लिख दिया गया कि 1818 में पेशवा सेना के खिलाफ लड़ा गया युद्ध ‘भारत’ के खिलाफ लड़ी गयी लड़ाई थी| सबसे पहले मीडिया को यह समझना होगा कि जिस कालखंड में भीमा कोरेगांव की लड़ाई हुयी थी या उस दौर की अन्य लड़ाईयां अंग्रेजों या अन्य आक्रांताओं द्वारा की गयी थीं, उस समय तक ‘भारत एक राष्ट्र’ जैसी कोई संकल्पना ही नहीं बनी थी| इस भौगोलिक भूभाग के अनेक खंड थे जिस पर अलग-अलग व्यक्तियों या कहें वंशों का शासन चलता था| युद्ध होते थे और विजेता को राज करने का अधिकार मिल जाता था| घुम्मकड़ और लड़ाकू क़बीलों के दौर से राजघरानों तक जैसे अनेक आक्रमणकारी भारत में आए वैसे ही अंग्रेज भी यहाँ आए। तब तक ‘भारत देश’ जैसी कोई कल्पना नहीं थी| 200 साल राज करने के बाद भी जब अंग्रेज वापस जा रहे थे, मतलब आज़ादी व विभाजन से पहले तक यहाँ ब्रिटिश शासित क्षेत्र के अलावा भी छोटे-बड़े कुल 565 स्वतन्त्र रियासतें थी| भारत का मौजूदा स्वरूप तो इन सब को एक सूत्र ...

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राजकुमार की जिंदगी से जंग

अलीगढ़ जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर अतरौली के गांव राजमार्गपुर में स्वण् रामप्रसाद के परिवार से मानो किस्मत रूठ सी गई हो। परिवार पर संकट भी ऐसा आया जिसे तमाम मजबूरियों और दुश्वारियों के बीच झेला जा रहा है। मानो वक्त से जंग लड़ी जा रही हो। रामप्रसाद की

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18 महीने की उम्र से ही आर्टिज़्म के लक्षण दिखने लगते है

मुकेश भारद्वाज,अलीगढ़-  अमुवि के जेएन मेडीकल काॅलज के मेडीसन संकाय में ‘‘अलीगढ एकेडमिक इनरिचमेंट प्रोग्राम’’ के अन्तर्गत डाॅ. ज्योत्सना नायर (एमडी) के ओर्टिज़्म एण्ड अदर डवलपमेंटल डिस्आर्डरः ए क्लीनिक एप्रोच विषय पर विशेष व्यख्यान का आयोजन किया गया। कम्बाइंड क्लीनिक मीट में मेडीकल काॅलेज के कई अध्यापकों तथा रेजीडेंट चिकित्सकों

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एएमयू मे दंत चिकित्सा पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस कल से

मुकेश भारद्वाज,अलीगढ़- अमुवि के डा0 जेड0ए0 डेंटल कालिज का प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग इंडियन प्रास्थोडोंटिक सोसाइटी यू0पी0 शाखा तथा ओकायामा विश्वविद्यालय जापान के सहयोग से आगामी 9-10 दिसम्बर 2017 को दंत चिकित्सा के विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन कर रहा है। यह कांफ्रेंस अमुवि के संस्थापक सर सैयद अहमद खान के द्विशतीय

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आॅनस्ट क्लब का रक्तदान शिविर संपन्न

प्रसून बाजपेई,खुर्जा- आॅनस्ट क्लब द्वारा रेडक्रास सोसाइटी के माध्यम से नगर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। मीडिया प्रभारी राजीव तायल द्वारा बताया गया कि शिविर का उद्घाटन क्लब महानिदेशक अशोक कुमार गुप्ता, नव निर्वाचित चेयरमैन पति हाजी रफीक फड्डा, एनसीसी कमाण्डर कामेश गुप्ता द्वारा फीता काटकर किया गया।

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विष्व एड्स दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन

नीरज चक्रपाणि,हाथरस-उ.प्र. राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के अन्तर्गत विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य में एड्स के बचाव के प्रसार एवं प्रचार हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. ब्रजेश राठौर की अध्यक्षता एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डा. अनिल सागर वशिष्ठ के दिशा-निर्देशन में जिला क्षय रोग केन्द्र पर विशेष संगोष्ठी का

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टीबी बीमारी एवं सीबीनाॅट मशीन की जाॅच के प्रति किया जागरुक

  नीरज चक्रपाणि,हाथरस- जिला क्षय रोग अधिकारी डा. अनिल सागर वशिष्ठ के निर्देशन में आरएनटीसीपी के अन्तर्गत जिला स्तर पर भारत स्काउट गाइड रैली को श्री दौलतराम बारहसैनी इन्टर कालेज के मैदान पर छात्र छात्राओं  तथा स्टाफ को टीबी बीमारी के लक्षण, जांच व उपचार आदि से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी जिला

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मेडीकल मे ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ सप्ताह मनाया

अलीगढ़- अमुवि के जेएन मेडीकल काॅलेज के स्त्री एवं प्रसूती विभाग द्वारा ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ सप्ताह का आयोजन किया गया जिसमें बच्चियों के जन्म को प्रसन्नता का विषय करार देते हुए नवजात बच्चियों की सुरक्षा पर बल दिया गया।न्यू ओपीडी ब्लाक में रोगियों को बताया गया कि अलीगढ़ तथा

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आर0बी0एस0 में आए योगाचार्य श्री हरिशंकर खान

उमेश कुमार बर्मन,टप्पल-टप्पल क्षेत्र के गांव मालव स्थित आर0बी0एस0 इण्टर काॅलेज में आज दिनांक 29.11.2017 दिन बुधवार को गीता जयन्ती के उपलक्ष्य मे योग वेदान्त सेवा समिति अलीगढ के योगाचार्य श्री हरिशंकर खान द्वारा बच्चो को श्रीमद् भागवद् गीता के महत्व पर प्रकाश डाला तथा तुलसी पूजन एवं गुरू पूजन

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28 स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 से पूर्व भारत सरकार की नामित एंजेसी ने किया अलीगढ़ में पूर्व-अभ्यास

अलीगढ़- स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 से पूर्व भारत सरकार की नामित एंजेसी ने किया अलीगढ़ में पूर्व-अभ्यास। सूखे कूड़े से बिक्स निर्माण के अभिनव पहल को सराहा। अलीगढ़ से अनुभव व अभिनव प्रयासों के साथ टीम हुयी रवाना। शहर में भ्रमण कर स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता के प्रयासों और स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 की

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