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एल.बी.के.पब्लिक सीनियर सैकेण्ड्री स्कूल द्वारा रैली निकालकर किया मतदाताओं को जागरुक करने का प्रयास

  इगलास। एल.बी.के.पब्लिक सीनियर सैकेण्ड्री स्कूल द्वारा 8वॉ ”मतदाता जागरुक अभियान“ मनाया गया जिसमें स्कूल के छात्र-छात्राओं ने रैली निकालकर मतदाताओं को जागरुक करने का प्रयास किया। अभियान में जूनियर वर्ग के सभी बच्चों ने भाग लिया, रैली मुंसिफ कोर्ट इगलास से प्रारम्भ हुई तथा नगर के मुख्य बाजारों से गुजरती हुई

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यूजीसी नेट पास करने पर बधाई

राजौव गौतम,खैर- कस्बा के मौहल्ला नई बस्ती निवासी डा0 गोपाल शर्मा पुत्र कुंवरपाल शर्मा ने तीसरी वार यूजीसी नेट की परीक्षा उत्तीण कर कस्बा का गौरव बढाया है। बता दें कि डा0 गोपाल शर्मा ने पूर्व में शिक्षाशास्त्र व अगे्रजी विषय में यूजीसी नेट की परीक्षा पूर्व में ही उत्तीण

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युद्ध स्मारकों को जातीय चश्में से न देखा जाए – सुशील स्वतंत्र 

सुशील स्वतंत्र  नया साल हर तीन सौ पैंसठ दिनों के बाद आ जाता है लेकिन 2018 के पहले दिन को हम इस लिहाज से अलग कह सकते हैं कि इस दिन ने देश के दो युद्ध स्मारकों को भी जातीय बहस का हिस्सा बना डाला| 200 वर्ष पहले 500 महारों की ब्रिटिश सैन्य टुकड़ी ने हजारों पेशवा सैनिकों को धूल चटाकर मराठा शासन को इस देश से खत्म किया था| उन वीर लड़ाकों की याद में अंग्रेजों ने वैसा ही युद्ध स्मारक भीमा कोरेगांव में ‘जय स्तंभ’ (विक्ट्री पिलर) के नाम से बनाया जैसा देश की राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट के नाम से बनवाया गया है| यह अंग्रेजों की परम्परा रही है| ऐसे विजय के प्रतीक देश के अन्य स्थानों पर आज भी मिल जाएंगें| दिल्ली के नजदीक नॉएडा के गाँव छलेरा में भी ऐसा ही एक युद्ध स्मारक है जिसे स्थानीय लोग ‘विजय गढ़’ कहते हैं| युद्ध में शहीद सैनिकों के गाँव के आस-आस ब्रिटिश हुकूमत ऐसे स्मारकों का निर्माण करवा दिया करती थी| 1 जनवरी 1818 को छोटी सी महार सैन्य टुकड़ी द्वारा अनुशासित, प्रशिक्षित और सुसज्जित मानी जाने वाली विशाल पेशवा सेना पर प्राप्त किए गए विजय के भारत के दलित समाज के लिए अनेक मायने हैं| 19वीं सदी के पेशवा राज में दलितों की सामाजिक स्थिति को समझे बिना, कोरेगांव विजय का दलितों के लिए महत्त्व को नहीं समझा जा सकता है| भारतीय इतिहास का यह वही कलंकित दौर था जब जाति विशेष के लोगों के गले में हांडी और कमर में झाड़ू बंधा होता था| जब जाति को छिपाना अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता था| पेशवा शासकों द्वारा इंसानों के एक समुदाय को अछूत घोषित कर उनपर लम्बे समय से शोषण और भेदभाव किया जा रहा था| भीमा कोरेगांव विजय ने इस देश से पेशवा राज का अंत कर अंग्रेजी हुकूमत को बहाल किया| भारत का दलित समाज आज भी 1 जनवरी को क्रूर पेशवाओं पर प्राप्त विजय के दिन को ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाता है| यहां यह समझना बहुत जरूरी है कि यह महज जातीय कारणों से नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से सामाजिक कारणों की वजह से किया जाता है| अपमान और अमानवीयता के जीवन से मुक्ति पाने के लिए और सम्मान व स्वतंत्रता हासिल करने के लिए दुनिया में अनेक क्रांतियां हुयीं हैं| भीमा कोरेगांव में निर्मित जय स्तंभ (विक्ट्री पिलर) पर हर साल 1 जनवरी को हजारों की संख्या में न सिर्फ दलित बल्कि मराठा, मुस्लिम, प्रगतिशील, बौद्ध और ओबीसी समुदाय के लोग शौर्य दिवस मनाकर 1818 युद्ध के उन महार लड़ाकों को सम्मान देने के लिए एकत्रित होते हैं| यह एक सच है कि भीमा कोरेगांव भारत की एक बड़ी आबादी के लिए तीर्थ बन चुका है लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि इस देश की मुख्यधारा की मीडिया इसकी घोर अनदेखी करता चला आया है| नववर्ष की चकाचौंध भरी खबरों, अपराध की घटनाओं, छलकते जामों और गैर-जरूरी न्यू इयर सेलिब्रेशंस के लिए जितना ‘स्पेस’ भारत की प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में दिया जाता है, उसके मुकाबले भीमा कोरेगांव की मुक्तिगाथा के लिए स्थान नगण्य रहा है| इस वर्ष तो मीडिया ने हद्द तब कर डाला जब अनेक अखबारों और वेबसाइट पर यह लिख दिया गया कि 1818 में पेशवा सेना के खिलाफ लड़ा गया युद्ध ‘भारत’ के खिलाफ लड़ी गयी लड़ाई थी| सबसे पहले मीडिया को यह समझना होगा कि जिस कालखंड में भीमा कोरेगांव की लड़ाई हुयी थी या उस दौर की अन्य लड़ाईयां अंग्रेजों या अन्य आक्रांताओं द्वारा की गयी थीं, उस समय तक ‘भारत एक राष्ट्र’ जैसी कोई संकल्पना ही नहीं बनी थी| इस भौगोलिक भूभाग के अनेक खंड थे जिस पर अलग-अलग व्यक्तियों या कहें वंशों का शासन चलता था| युद्ध होते थे और विजेता को राज करने का अधिकार मिल जाता था| घुम्मकड़ और लड़ाकू क़बीलों के दौर से राजघरानों तक जैसे अनेक आक्रमणकारी भारत में आए वैसे ही अंग्रेज भी यहाँ आए। तब तक ‘भारत देश’ जैसी कोई कल्पना नहीं थी| 200 साल राज करने के बाद भी जब अंग्रेज वापस जा रहे थे, मतलब आज़ादी व विभाजन से पहले तक यहाँ ब्रिटिश शासित क्षेत्र के अलावा भी छोटे-बड़े कुल 565 स्वतन्त्र रियासतें थी| भारत का मौजूदा स्वरूप तो इन सब को एक सूत्र ...

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अलीगढ़ में विवि की स्थापना के लिए हिन्दू-छात्र हुआ एकजुटअलीगढ़ में विवि की स्थापना के लिए हिन्दू-छात्र हुआ एकजुटजनप्रतिनिधियों का घेराव कर जिला मुख्यालय से करेगें शंखनाद

मुकेश भारद्वाज,अलीगढ़- मण्डल में राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु एवं आगरा विश्वविद्यालय की भ्रष्ट व्यवस्था से मुक्ति दिलाकर हिन्दू छात्रों के लिए बेहतर उच्च शिक्षा के लिए ‘‘विश्वविद्यालय बनाओ मंच’’ ने आन्दोलन का आगाज कर दिया है। मंच की एक अति आवश्यक बैठक सोमवार को डी0एस0 काॅलेज में सम्पन्न हुई।

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बीबी गर्ल इंटर काॅलेज में हुआ कंबल वितरण

मुकेश भारद्वाज,अलीगढ़- महानगर के बीबी गल्र्स इंटर काॅलेज में शनिवार को कंबल वितरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता काॅलेज की प्रधानाचार्या प्रीति गौतम ने की। साथ ही आयोजन में कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष सीपी गौतम ने निर्धन व असहाय लोगों को कंबलों का वितरण कराया गया। इस दौरान

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एएमयू मे विज्ञान प्रदर्शनी ‘‘विंग्स आॅफ विज़्डम’’ का आयेजन प्रदर्शनी का आयोजन अच्छा कदम सामने आयेगे दूरगामी परिणामःखान

मुकेश भारद्वाज,अलीगढ़-अमुवि के सैयद हामिद सैकेण्ड्री स्कूल (ब्वायज) के साइंस क्लब द्वारा वार्षिक विज्ञान प्रदर्शनी ‘‘विंग्स आॅफ विज़्डम’’ का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए स्कूल शिक्षा निदेशायलय के निदेशक प्रो. असफर अली खाॅन ने कहा कि यह प्रदर्शनी एक अच्छा कदम है तथा इसके दूरगामी परिणाम सामने

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यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर में नियमों को ताक पर रख बिना प्रमाण पत्र छात्रों को परीक्षा दिलाने वाले 25 प्रधानाध्यापकों के खिलाफ एफआईआर

अलीगढ़, यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर में नियमों को ताक पर रख बिना प्रमाण पत्र प्राइवेट छात्रों को परीक्षा दिलाने वाले 25 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के खिलाफ एफआईआर करा दी गई है। डीआईओएस ने शासन की ओर से आदेश आने के बाद सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए यह

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इग्नूः प्रबंधन के डिप्लोमा कार्यक्रमों में अब देगा सीधे प्रवेश 

 मुकेश भारद्वाज,अलीगढ़-इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) अपनी प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अब प्रबंधन (मैंनेजमेंट) डिप्लोमा में सीधे प्रवेश दे रहा है। डिप्लोमा कोर्स के लिए अब नहीं देनी होगी प्रवेश परीक्षा।क्षेत्रीय निदेशक डाॅ0 एम0 आर0 फैसल ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले विद्यार्थियों को प्रबंधन के

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अमुवि के 10 शोध छात्रों ने प्रस्तुत किये लगभग 200 शोध पत्र

मुकेश भागरद्वाज,अलीगढ़- अमुवि के 10 शोध छात्रों ने नई दिल्ली स्थित भारतीय विद्या भवन में वैदिक ज्ञान का व्यवहारिक पहलू विषय पर आयोजित 21वीं वाइडर एसोसिएशन फाॅर वैदिक स्टडीज़ कांफ्रेंस में भाग लिया। कांफ्रेंस में लगभग 200 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये तथा देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक

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इग्नूः प्रबंधन के डिप्लोमा कार्यक्रमों में अब देगा सीधे प्रवेश 

मुकेश भारद्वाज,अलीगढ़-इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) अपनी प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अब प्रबंधन (मैंनेजमेंट) डिप्लोमा में सीधे प्रवेश दे रहा है। डिप्लोमा कोर्स के लिए अब नहीं देनी होगी प्रवेश परीक्षा।क्षेत्रीय निदेशक डाॅ0 एम0 आर0 फैसल ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले विद्यार्थियों को प्रबंधन के

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